पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, पश्चिम एशिया तनाव के बीच 10 दिनों में चौथी बढ़ोतरी

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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। बीते 10 दिनों में चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, जिसके बाद परिवहन लागत से लेकर घरेलू बजट तक पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी ताजा संशोधन के अनुसार पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में फिर इजाफा किया गया है। इससे पहले भी हाल के दिनों में कई चरणों में कीमतें बढ़ चुकी हैं, जिसके कारण कुल मिलाकर ईंधन की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने वाहन चालकों के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण हैं। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है, जिसका असर अब खुदरा ईंधन कीमतों में दिखाई दे रहा है। जानकारों का कहना है कि तेल कंपनियां लागत दबाव और पहले हुए नुकसान की भरपाई के लिए चरणबद्ध तरीके से कीमतों में संशोधन कर रही हैं। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता।

नई कीमतों के बाद देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम नए स्तर पर पहुंच गए हैं। अलग-अलग राज्यों में कर व्यवस्था और वैट के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है, लेकिन अधिकांश महानगरों में पेट्रोल पहले से ही 100 रुपये प्रति लीटर के ऊपर बना हुआ है। डीजल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है, जिससे माल ढुलाई और परिवहन क्षेत्र की लागत बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने का सीधा असर सब्जियों, खाद्यान्न, किराए और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण कई शहरों में लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने लगे हैं। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कीमतों में यह रुझान जारी रहा, तो इसका असर महंगाई दर और आम परिवारों के मासिक बजट पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों की अगली रणनीति पर भी लोगों की नजर बनी हुई है, क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीधे तौर पर आम जनता की जेब और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करती हैं।

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