नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक सुरक्षा, समुद्री सहयोग और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं सामने आईं। बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित व्यापार मार्गों और नई आर्थिक साझेदारियों पर चर्चा की। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि भारत और अमेरिका महत्वपूर्ण खनिजों तथा उनके प्रसंस्करण (क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग) के लिए एक नए फ्रेमवर्क पर साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, रक्षा तकनीक और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में उपयोग होने वाले रणनीतिक खनिजों की सुरक्षित और भरोसेमंद उपलब्धता अब वैश्विक आर्थिक और सामरिक प्राथमिकता बन चुकी है। इस प्रस्तावित सहयोग का उद्देश्य खनिजों की आपूर्ति, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित बनाना है, ताकि किसी एक देश या सीमित स्रोत पर निर्भरता कम की जा सके।
बैठक में क्वाड देशों ने सामूहिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और निवेश बढ़ाने के लिए साझा सहयोग पर जोर दिया। माना जा रहा है कि यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब रेयर अर्थ और अन्य रणनीतिक खनिजों को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और कई देश आपूर्ति बाधाओं से बचने के लिए वैकल्पिक ढांचे विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। क्वाड सदस्य देशों ने तकनीकी सहयोग, आपूर्ति विविधीकरण और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में समन्वित नीति तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसी बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और बंदरगाह अवसंरचना को लेकर अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्वाड देश समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करने और समुद्री गतिविधियों पर बेहतर नजर रखने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे। इसके साथ ही प्रशांत क्षेत्र के देशों में बंदरगाह अवसंरचना के विकास के लिए नई पहल शुरू करने की बात कही गई, जिसका उद्देश्य समुद्री संपर्क, व्यापारिक कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। इस पहल को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री मार्गों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में सदस्य देशों ने नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था, सुरक्षित समुद्री व्यापार और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता को भी दोहराया। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि चर्चा का मुख्य फोकस आर्थिक स्थिरता, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और विश्वसनीय सप्लाई चेन पर रहा, जबकि रूबियो ने संकेत दिया कि क्वाड अब केवल रणनीतिक संवाद तक सीमित मंच नहीं रह गया है, बल्कि व्यावहारिक साझेदारी और ठोस परियोजनाओं के जरिए क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड की रणनीतिक भूमिका और मजबूत हो सकती है तथा सदस्य देशों को महत्वपूर्ण संसाधनों और समुद्री ढांचे के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिल सकती है।




