देश में खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार के सामने उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। संभावित अल नीनो के असर से मानसून कमजोर रहने की आशंका और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने खाद आपूर्ति तथा लागत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यूरिया की अग्रिम खरीद में तेजी लाई है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में यूरिया खरीद में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है ताकि आने वाले महीनों में किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद वितरण प्रणाली पर कड़ी निगरानी रखें, पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करें और किसी भी तरह की कालाबाजारी या कृत्रिम संकट को रोकने के लिए जिला स्तर पर निगरानी तंत्र सक्रिय करें।
सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत उर्वरकों और उनसे जुड़े कई कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमोनिया, सल्फर और अन्य रसायनों की कीमतों पर देखा जा रहा है, जिनका इस्तेमाल खाद उत्पादन में किया जाता है। इसके अलावा समुद्री परिवहन लागत और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से उर्वरक उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो किसान फसल उत्पादन बनाए रखने के लिए उर्वरकों का अधिक इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे यूरिया और डीएपी जैसी खादों की मांग अचानक बढ़ सकती है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने अग्रिम रणनीति अपनाते हुए खाद उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि किसानों को खाद संकट का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए पर्याप्त स्टॉक की व्यवस्था की जा रही है और सब्सिडी तंत्र के जरिए बढ़ी हुई लागत का असर किसानों पर पड़ने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, कुछ राज्यों से समय-समय पर खाद की कमी और वितरण संबंधी शिकायतें भी सामने आती रही हैं, जिससे खरीफ सीजन के दौरान मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।




