NEET परीक्षा सुधारों पर जवाबदेही तय होगी, NTA से स्पष्टीकरण तलब

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नीट-यूजी 2026 परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। संसद की स्थायी समिति ने NTA और उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों से परीक्षा सुरक्षा, पेपर लीक की जांच और पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है। समिति ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि 2024 के नीट विवाद के बाद सुझाए गए सुधारों में से कितने लागू किए गए हैं और किन कारणों से कई महत्वपूर्ण सिफारिशें अब तक पूरी तरह अमल में नहीं लाई जा सकी हैं।

दरअसल, 2024 में नीट परीक्षा को लेकर उठे विवादों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति ने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए कई अहम सुझाव दिए थे। इनमें प्रश्नपत्र निर्माण और वितरण प्रणाली को मजबूत करना, तकनीकी निगरानी बढ़ाना, सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करना और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल था। हालांकि हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इन सिफारिशों का बड़ा हिस्सा अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है, जिसे लेकर संसदीय समिति ने चिंता जताई है।

बैठक के दौरान सांसदों ने NTA अधिकारियों से पेपर लीक मामले की जांच, सुरक्षा में हुई कथित चूक और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर भी सवाल किए। NTA ने समिति को बताया कि उपलब्ध जांच के आधार पर प्रश्नपत्र एजेंसी की आंतरिक प्रणाली से लीक नहीं हुआ था और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि परीक्षा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई नए कदम उठाए जा रहे हैं।

विवाद के बाद सरकार और NTA ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की दिशा में काम शुरू किया है। भविष्य में “जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर” जैसी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है, जिसके तहत प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी यह जानकारी नहीं होगी कि वे किस परीक्षा के लिए प्रश्न तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय प्रश्न बैंक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुवाद प्रणाली और बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र विकसित करने की योजनाओं पर भी काम चल रहा है।

इस बीच, आगामी परीक्षाओं को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत किया गया है। प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन और अनुवाद से जुड़े विशेषज्ञों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और गोपनीयता बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संसदीय समिति की सख्ती और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों की समीक्षा से NTA की जवाबदेही बढ़ेगी तथा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का दबाव बनेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि एजेंसी लंबित सुधारों को कितनी तेजी से लागू करती है और छात्रों का भरोसा बहाल करने में कितनी सफल रहती है।

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