प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की विदेश नीति में आए व्यापक बदलावों और उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की कूटनीति अधिक सक्रिय, आत्मविश्वासी और राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित हुई है। उनके अनुसार, भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी एक स्वतंत्र और प्रभावशाली पहचान स्थापित की है, जहां देश न केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखता है, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार की विदेश नीति का उद्देश्य केवल अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करना नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, रणनीतिक साझेदारी और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के हितों की रक्षा को भी प्राथमिकता देना रहा है।
जयशंकर ने बताया कि मोदी सरकार ने “पड़ोसी पहले” नीति के माध्यम से दक्षिण एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया, जबकि “एक्ट ईस्ट” नीति के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को विस्तार दिया गया। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका, रूस, यूरोपीय देशों, पश्चिम एशिया और अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को कायम रखा। उन्होंने कहा कि भारत ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर विदेश नीति से जुड़े फैसले लिए हैं।
विदेश मंत्री के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत की वैश्विक भूमिका लगातार मजबूत हुई है। देश ने G20, BRICS और Quad जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। भारत ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया गया और समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में भी सक्रिय योगदान दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि विदेश नीति को आर्थिक विकास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। विभिन्न देशों के साथ व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े सहयोग को बढ़ावा देकर भारत की आर्थिक संभावनाओं को मजबूत किया गया। हाल के वर्षों में ब्रिटेन, इंडोनेशिया, खाड़ी देशों और अन्य रणनीतिक साझेदारों के साथ बढ़ते सहयोग को इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसके अलावा, विदेशों में संकट की परिस्थितियों के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए चलाए गए विभिन्न राहत एवं निकासी अभियानों को भी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया गया।
जयशंकर ने कहा कि आज भारत केवल वैश्विक घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि विश्व व्यवस्था को आकार देने वाले प्रमुख देशों में अपनी जगह बना चुका है। उनकी दृष्टि में पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति अधिक परिणामोन्मुख, निर्णायक और दूरदर्शी बनी है, जिसने देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।



