भारत की सीमा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने डिजिटल लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (एलपीएमएस) का उद्घाटन किया, जिसे देश के लैंड पोर्ट्स की कार्यप्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्रणाली सीमा पार व्यापार, यात्रियों की आवाजाही और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को एकीकृत मंच पर लाकर पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में मदद करेगी।
एलपीएमएस के माध्यम से लैंड पोर्ट्स पर होने वाली कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया जाएगा। इसमें स्लॉट बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान, कार्गो ट्रैकिंग, दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन और विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इस प्रणाली के लागू होने से व्यापारिक गतिविधियों में लगने वाला समय कम होगा, कागजी कार्यवाही घटेगी और सीमा क्षेत्रों में व्यापार को नई गति मिलेगी। साथ ही, सुरक्षा एजेंसियों को भी रीयल-टाइम जानकारी उपलब्ध होने से निगरानी और प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने मेघालय के दावकी और त्रिपुरा के श्रीमंतपुर लैंड पोर्ट पर विकसित हितधारक आवास सुविधाओं का भी उद्घाटन किया। इन सुविधाओं का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों, सुरक्षा बलों, व्यापारियों और अन्य संबंधित पक्षों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि मजबूत आधारभूत संरचना और आधुनिक तकनीक का संयोजन सीमा प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगा।
केंद्र सरकार ने यह भी घोषणा की कि वर्तमान में देश में 15 लैंड पोर्ट संचालित हो रहे हैं, जबकि अगले तीन वर्षों में 11 नए लैंड पोर्ट विकसित किए जाएंगे। इन नए लैंड पोर्ट्स के निर्माण से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर व्यापारिक और यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा, क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा और सीमा से जुड़े राज्यों के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के माध्यम से संचालित यह विस्तार कार्यक्रम भारत की सीमा अवसंरचना को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
सरकार के अनुसार, डिजिटल लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और नए लैंड पोर्ट्स का विकास केवल सीमा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति, व्यापार सुगमता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इससे सीमा क्षेत्रों में रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ने की उम्मीद है, वहीं भारत के पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक संपर्क भी अधिक सुगम और प्रभावी बन सकेगा। सरकार का विश्वास है कि यह पहल विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।




