भारत की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं NEET और JEE को लेकर चीन की ओर से की गई हालिया टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी है। चीन ने अपनी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ (Gaokao) के सफल आयोजन का उदाहरण देते हुए अप्रत्यक्ष रूप से भारत की परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े करने की कोशिश की है। यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन, पेपर लीक और परीक्षा सुरक्षा को लेकर चर्चाएं जारी हैं। चीन के सरकारी प्रतिनिधियों ने गाओकाओ को दुनिया की सबसे बड़ी और व्यवस्थित परीक्षाओं में से एक बताते हुए उसके सफल संचालन को अपनी प्रशासनिक क्षमता का उदाहरण बताया, जिसे कई विश्लेषकों ने भारत की परीक्षा व्यवस्था पर एक परोक्ष तंज के रूप में देखा है।
हाल ही में आयोजित गाओकाओ परीक्षा में करीब 1.29 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया। चीन में यह परीक्षा विश्वविद्यालयों में प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है और छात्रों के भविष्य का निर्धारण करने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। परीक्षा के दौरान स्थानीय प्रशासन, परिवहन विभाग, सुरक्षा एजेंसियों और अन्य सरकारी संस्थानों ने विशेष व्यवस्थाएं कीं ताकि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। चीन की ओर से यह भी दावा किया गया कि इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित होने के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही और किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी।
चीन की इस टिप्पणी के बाद भारत में कई विशेषज्ञों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि चीन ने गाओकाओ की सफलता का उल्लेख केवल अपने मॉडल की प्रशंसा के लिए नहीं बल्कि भारत की परीक्षा प्रणाली को वैश्विक मंच पर कठघरे में खड़ा करने के उद्देश्य से भी किया। पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां सामने आई हैं, जिनकी वजह से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। ऐसे में चीन द्वारा अपनी परीक्षा प्रणाली को आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी याद दिलाते हैं कि चीन की परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रही है। विभिन्न रिपोर्टों में सामने आया है कि वहां भी समय-समय पर नकल, संगठित धोखाधड़ी और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। चीनी अधिकारियों को ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करनी पड़ी है और हजारों लोगों को परीक्षा से जुड़े अपराधों में दंडित भी किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि परीक्षा सुरक्षा की चुनौती केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य बड़े देशों के सामने भी मौजूद है।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भारत और चीन की परीक्षा प्रणालियों की सीधी तुलना करना पूरी तरह उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों देशों की शिक्षा संरचना और प्रवेश प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। भारत में इंजीनियरिंग, चिकित्सा और अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जबकि चीन में गाओकाओ अधिकांश विश्वविद्यालय प्रवेश का प्रमुख आधार है। इसके बावजूद यह घटनाक्रम भारत के लिए परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की टिप्पणियों से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि भारत अपनी परीक्षा प्रणाली को और अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार सुधार करता रहे। हाल के वर्षों में सरकार ने पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई कानूनी और तकनीकी कदम उठाए हैं। आने वाले समय में NEET, JEE और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना न केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि देश की संस्थागत विश्वसनीयता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।




