नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मानव विकास, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विभिन्न राज्यों की पहलों पर व्यापक चर्चा हुई। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा समावेशी विकास पर विशेष बल दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों से युवाओं, महिलाओं और कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए नवाचार आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने का आह्वान किया। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि सामाजिक क्षेत्र में निवेश ही दीर्घकालिक आर्थिक विकास और मानव संसाधन सशक्तिकरण की मजबूत नींव तैयार करेगा।
बैठक के दौरान दिल्ली सरकार की ‘लखपति बिटिया’ योजना विशेष रूप से चर्चा में रही। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक विभिन्न चरणों में बेटियों के नाम पर वित्तीय सहायता जमा की जाएगी, जो समय के साथ बढ़कर एक लाख रुपये या उससे अधिक की राशि में परिवर्तित हो सकती है। सरकार का मानना है कि इससे बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, स्कूल छोड़ने की दर कम होगी और बेटियों के भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। इस योजना को महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महिला विकास के मुद्दे पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्यों से अधिक प्रयास करने की अपील की। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों और उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं को विकास प्रक्रिया का केंद्र बनाना विकसित भारत की अवधारणा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि महिलाओं और युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और वित्तीय सहायता के अवसरों से जोड़कर आर्थिक प्रगति को नई गति दी जा सकती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में दिल्ली सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जा रही मुफ्त MRI और CT स्कैन जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया। इन पहलों का उद्देश्य आम नागरिकों, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को महंगे चिकित्सा परीक्षणों के आर्थिक बोझ से राहत देना है। सरकारी अस्पतालों से रेफर किए गए मरीजों को बिना अतिरिक्त खर्च के आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने से स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान हुई है। साथ ही अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।
नीति आयोग की बैठक में इस बात पर सहमति जताई गई कि शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाएं केवल सामाजिक कल्याण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक और मानव विकास यात्रा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राज्यों को एक-दूसरे के सफल मॉडलों से सीखने और उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपनाने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तो वे समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के साथ-साथ विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।




