रक्षा निर्माण में भारत का दम, रिकॉर्ड उत्पादन पर पीएम मोदी ने दी बधाई

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भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में हो रही व्यापक प्रगति की एक झलक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्माण के क्षेत्र में हुए सुधारों और सरकार की नीतियों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है और बीते पांच वर्षों में रक्षा उत्पादन दोगुने से अधिक हो चुका है। सरकार का मानना है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन पहलों के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण, अनुसंधान एवं विकास तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। रक्षा निर्यात में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है और भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग कई देशों में बढ़ी है। मिसाइल प्रणालियों, रडार, नौसैनिक उपकरणों और अन्य रक्षा सामग्री के निर्यात ने भारत की वैश्विक साख को मजबूत किया है।

देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। तेजस लड़ाकू विमान, आकाश मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत जैसे प्रोजेक्ट भारत की रक्षा तकनीक और निर्माण क्षमता के प्रमुख उदाहरण बनकर उभरे हैं। इसके अलावा निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों की बढ़ती भागीदारी ने रक्षा उद्योग को नई गति प्रदान की है।

सरकार का कहना है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत नहीं कर रही, बल्कि रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा दे रही है। रक्षा उत्पादन में आधुनिक तकनीकों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्वांटम तकनीक और उन्नत संचार प्रणालियों को शामिल किया जा रहा है, जिससे भारतीय रक्षा तंत्र और अधिक सक्षम बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनेगा तथा वैश्विक रक्षा उद्योग में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सामूहिक क्षमता, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का परिणाम है।

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