भारत-जापान शिखर वार्ता में निवेश और तकनीकी सहयोग पर बन सकती है सहमति

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भारत और जापान के बीच होने वाले आगामी शिखर सम्मेलन में सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ मिनरल्स) और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है। दोनों देश ऐसे समय में अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा, ऊर्जा संक्रमण और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, शिखर वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोगी ढांचों पर सहमति बन सकती है, जिससे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी और गहरी होगी।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र को वार्ता का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है। भारत अपनी घरेलू चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करने के लिए वैश्विक भागीदारों की तलाश में है, जबकि जापान के पास उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक, उपकरण और विशेषज्ञता का व्यापक अनुभव है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन प्रशिक्षण को लेकर नई पहल की घोषणा की जा सकती है। इससे भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद मिलेगी।

दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, रक्षा उपकरणों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में इन खनिजों की आपूर्ति कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर है, जिससे वैकल्पिक और भरोसेमंद स्रोत विकसित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। भारत और जापान खनिज खोज, प्रसंस्करण तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रयासों पर विचार कर रहे हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को विस्तार देने की योजना है। हरित ऊर्जा, हाइड्रोजन, अमोनिया आधारित ईंधन, ऊर्जा दक्षता और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि जापान भी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ा रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संयुक्त परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूती देगा। चीन पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की निर्भरता कम करने, महत्वपूर्ण तकनीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के साझा उद्देश्य भारत और जापान को और करीब ला रहे हैं। यदि प्रस्तावित समझौतों पर सहमति बनती है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर खुलेंगे तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उनकी साझेदारी और मजबूत होगी।

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