पीने के पानी पर नई चेतावनी! भारत समेत कई देशों में मैंगनीज का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर

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दुनियाभर में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता को लेकर एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने गंभीर चिंता जताई है। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature में प्रकाशित शोध के अनुसार भारत सहित कई देशों में करोड़ों लोग ऐसा भूजल पीने को मजबूर हैं, जिसमें मैंगनीज (Manganese) की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक है। शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक इस तरह के पानी का सेवन खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

अध्ययन के मुताबिक मैंगनीज एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जिसकी सीमित मात्रा शरीर के लिए जरूरी होती है। हालांकि पेयजल में इसकी अधिक मात्रा लगातार शरीर में पहुंचने पर यह विषैले प्रभाव पैदा कर सकती है। हाल के वर्षों में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2021 में पेयजल में मैंगनीज की अनुशंसित सीमा 400 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से घटाकर 80 माइक्रोग्राम प्रति लीटर कर दी थी। कई देशों के राष्ट्रीय मानक इससे भी अधिक सख्त हैं।

शोध में बताया गया है कि दक्षिण एशिया, उप-सहारा अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों के कई हिस्सों में भूजल में प्राकृतिक रूप से मैंगनीज का स्तर अधिक पाया जाता है। भारत भी उन देशों में शामिल है, जहां अनेक इलाकों में भूजल में मैंगनीज की मात्रा सुरक्षित सीमा से ऊपर दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह चट्टानों और मिट्टी में मौजूद खनिजों का भूजल में घुलना है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां भी प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक अधिक मैंगनीज युक्त पानी पीने से तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकता है। बच्चों में सीखने की क्षमता, स्मरण शक्ति, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कुछ अध्ययनों में इसे न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और व्यवहार संबंधी बदलावों से भी जोड़ा गया है। वयस्कों में भी लंबे समय तक अत्यधिक संपर्क से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में लोग मुख्य रूप से भूजल पर निर्भर हैं, वहां नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता और प्रभावी जल शोधन प्रणाली विकसित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने सरकारों और स्थानीय प्रशासन से भूजल की निगरानी बढ़ाने तथा जोखिम वाले इलाकों की पहचान कर लोगों को जागरूक करने की अपील की है। अध्ययन के अनुसार समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो मैंगनीज से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन सुरक्षित पेयजल की दिशा में नीतिगत सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है। भारत सहित उन देशों के लिए, जहां बड़ी आबादी भूजल पर निर्भर है, नियमित परीक्षण, आधुनिक जल शोधन तकनीकों का विस्तार और सुरक्षित जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना आने वाले समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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