राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी पड़ी भारी, SIT का दावा

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में एक और महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहले ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कैमरे और आधुनिक निगरानी प्रणाली लगाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन इस पर समय रहते अमल नहीं किया गया। अब SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट में AI आधारित निगरानी प्रणाली को प्रमुख सिफारिशों में शामिल करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि यदि इन तकनीकी उपायों को पहले लागू कर दिया जाता, तो चढ़ावा चोरी जैसी घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो सकती थी।

SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती और नकदी के रखरखाव की मौजूदा व्यवस्था में कई स्तरों पर सुरक्षा संबंधी कमियां थीं। नकदी की गिनती वाले कक्ष की निगरानी पर्याप्त नहीं थी, कर्मचारियों के प्रवेश और निकास की प्रभावी जांच नहीं होती थी तथा सीसीटीवी कैमरों की कवरेज में भी कई ऐसे स्थान थे, जहां गतिविधियां स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड नहीं हो पाती थीं। जांच के दौरान यह निष्कर्ष निकाला गया कि आधुनिक AI आधारित कैमरे, बेहतर निगरानी प्रणाली और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पहले से लागू होती तो संदिग्ध गतिविधियों का तुरंत पता लगाया जा सकता था और चोरी की घटनाओं को रोका जा सकता था।

प्रस्तावित AI निगरानी प्रणाली केवल कैमरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया, नकदी के आवागमन और कर्मचारियों की गतिविधियों पर भी स्वतः नजर रखेगी। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया से हटकर कोई संदिग्ध गतिविधि करता है, तो प्रणाली तुरंत अलर्ट जारी करेगी। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य में ऑडिट और जांच को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

इससे पहले SIT की जांच में यह भी सामने आया था कि लगभग 45 दिनों की अवधि में सीसीटीवी फुटेज में कई संदिग्ध गतिविधियां दर्ज हुई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों पर नकदी को जेब, कपड़ों और जूतों में छिपाकर बाहर ले जाने के आरोप लगे हैं। जांच में सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही, कर्मचारियों की तलाशी की कमजोर व्यवस्था, निगरानी में कमी और प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त पर्यवेक्षण के अभाव को चोरी की घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

मामले में प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी जांच के दायरे में है। जांच के दौरान ट्रस्ट प्रशासन ने कुछ प्रशासनिक बदलाव किए हैं और स्पष्ट किया है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक व्यवस्थाओं के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग आवश्यक हो गया है। AI आधारित निगरानी, उन्नत सीसीटीवी नेटवर्क और डिजिटल ऑडिट प्रणाली लागू होने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ श्रद्धालुओं का विश्वास भी और अधिक सुदृढ़ होगा।

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