देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी भूख हड़ताल के दौरान प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से छात्रों की आवाज सुनने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि सरकार को युवाओं और छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। वांगचुक ने कहा कि यदि डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर नकल, पेपर लीक या परीक्षा में धांधली के जरिए तैयार होंगे, तो देश के विकास और भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति की नींव होती है।
वांगचुक ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत और ईमानदारी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं जैसी घटनाएं उनकी मेहनत को बेकार कर देती हैं। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए तथा ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का प्रश्न है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं के हितों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। वांगचुक ने कहा कि यदि समय रहते परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो इसका असर स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग, प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा।
लगातार कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाते रहेंगे और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेंगे। इस बीच कई सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनकी मांगों पर विचार करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार से पहल करने की अपील की है। वांगचुक ने अंत में कहा कि भारत जैसे युवा देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रतिभा और ईमानदारी है, इसलिए परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।




