पत्रकारों पर हमले से गरमाया NEET विवाद, CM शुभेंदु अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर लिया हाल

SHARE:

कोलकाता में NEET-UG परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़कने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदर्शन के दौरान कुछ पत्रकारों और पुलिसकर्मियों पर कथित हमले की घटना सामने आने के बाद कोलकाता पुलिस ने अलग-अलग मामलों में छह FIR दर्ज की हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटना की निंदा करते हुए घायल पत्रकारों से मुलाकात की और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से कोलकाता में बड़ा मार्च निकाला गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, कथित अनियमितताओं की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। जुलूस मध्य कोलकाता के कई महत्वपूर्ण इलाकों से होते हुए धर्मतला और एस्प्लेनेड क्षेत्र तक पहुंचा, जहां बाद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

रिपोर्टों के अनुसार, डोरिना क्रॉसिंग के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर पत्थर और जूते फेंकने का आरोप लगाया गया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और स्थिति को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज किया। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के दौरान कुछ मीडिया कर्मियों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी की खबरें भी सामने आईं।

प्रदर्शन को कवर कर रहे कई पत्रकारों के घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी एसएसकेएम अस्पताल पहुंचे और घायल पत्रकारों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों और पुलिसकर्मियों पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा। सरकार की ओर से घायल पत्रकारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

घटना के बाद कोलकाता पुलिस ने हिंसा और हमले से जुड़े मामलों में छह FIR दर्ज की हैं। पुलिस अब घटनास्थल के वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। पुलिस का फोकस उन लोगों पर है जिन पर पत्रकारों और पुलिसकर्मियों पर हमला करने, हिंसा फैलाने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप है।

इस मामले में ‘गुंडा एक्ट’ के तहत कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में NEET प्रदर्शन के आरोपियों के खिलाफ इसी कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करने से पहले पुलिस या राज्य सरकार के आधिकारिक आदेश का इंतजार करना जरूरी है। यदि जांच में किसी आरोपी की भूमिका संगठित हिंसा या गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

NEET विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और छात्र संगठनों का विरोध जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और पत्रकारों या पुलिसकर्मियों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कोलकाता की घटना के बाद अब पुलिस की जांच और सरकार की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। छह FIR दर्ज होने के बाद पुलिस वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है। वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सख्त रुख से संकेत मिल रहा है कि पत्रकारों और पुलिसकर्मियों पर कथित हमले के मामले में सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और किसी विशेष कानून के तहत कार्रवाई की पुष्टि आधिकारिक जांच और पुलिस के अगले बयान के बाद ही स्पष्ट होगी।

Leave a Comment