भारतीय स्क्वैश के लिए 25 जुलाई 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब युवा खिलाड़ी अनाहत सिंह ने कनाडा में आयोजित 2026 वर्ल्ड स्क्वैश जूनियर चैंपियनशिप में महिला एकल का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ वह जूनियर स्क्वैश विश्व चैंपियनशिप का महिला एकल खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। फाइनल मुकाबले में शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत सिंह ने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे तीन गेमों में 11-3, 11-7, 11-9 से हराकर शानदार जीत दर्ज की।
फाइनल मुकाबले में अनाहत ने शुरुआत से ही आक्रामक और नियंत्रित खेल का प्रदर्शन किया। पहले गेम में उन्होंने अपनी तेज गति और सटीक शॉट्स की बदौलत 11-3 से बढ़त बनाई। दूसरे गेम में मिस्र की खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश की, लेकिन अनाहत ने महत्वपूर्ण रैलियों में धैर्य बनाए रखा और 11-7 से गेम अपने नाम कर लिया। तीसरे गेम में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन निर्णायक पलों में भारतीय खिलाड़ी ने मानसिक मजबूती दिखाई और 11-9 से गेम जीतकर मुकाबला 3-0 से अपने नाम कर लिया।
अनाहत सिंह की यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जूनियर विश्व चैंपियनशिप में लंबे समय से मिस्र के खिलाड़ियों का दबदबा रहा है। उनकी ऐतिहासिक सफलता ने इस वर्चस्व को समाप्त किया है। इससे पहले 2010 में अमेरिका की अमांडा सोबी ने यह खिताब जीता था, जिसके बाद मिस्र की खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया। ऐसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी माहौल में अनाहत का खिताब जीतना भारतीय स्क्वैश के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।
खिताबी मुकाबले से पहले अनाहत सिंह ने सेमीफाइनल में भी मिस्र की खिलाड़ी बार्ब समेह को 3-1 से हराया था। इस जीत के साथ वह विश्व जूनियर चैंपियनशिप के महिला एकल फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थीं। इसके बाद फाइनल में उन्होंने बिना कोई गेम गंवाए जीत दर्ज की और अपने अभियान को ऐतिहासिक स्वर्णिम उपलब्धि के साथ समाप्त किया।
अनाहत सिंह की सफलता भारतीय स्क्वैश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में स्क्वैश की नई प्रतिभाएं लगातार उभर रही हैं, लेकिन जूनियर विश्व चैंपियनशिप के महिला एकल वर्ग का खिताब अब तक देश के खाते में नहीं आया था। अनाहत ने इस कमी को पूरा करते हुए विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। उनकी तकनीकी क्षमता, तेज खेल और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता ने उन्हें दुनिया की शीर्ष जूनियर खिलाड़ियों के बीच एक अलग पहचान दिलाई है।
यह सफलता अनाहत सिंह के पिछले अनुभवों के बाद आई है। 2025 में वह विश्व जूनियर चैंपियनशिप के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं और कांस्य पदक जीता था। उस अनुभव से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कमियों को समझने और अपने खेल में सुधार करने का अवसर मिला। एक साल बाद उन्होंने उसी मंच पर अपने प्रदर्शन को खिताबी जीत में बदल दिया, जो उनकी निरंतर मेहनत, तैयारी और बड़े मुकाबलों में दबाव संभालने की क्षमता को दर्शाता है।
अनाहत सिंह की ऐतिहासिक जीत केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय स्क्वैश के भविष्य के लिए भी बड़ी उम्मीद जगाती है। जूनियर विश्व चैंपियन बनने के बाद अब उनसे वरिष्ठ स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ गई है। उनकी सफलता देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है और यह साबित करती है कि भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर पर लंबे समय से मजबूत माने जाने वाले देशों के खिलाड़ियों को चुनौती देकर बड़े खिताब जीत सकते हैं। कनाडा में इतिहास रचकर अनाहत सिंह ने भारतीय स्क्वैश के इतिहास में एक नया और यादगार अध्याय जोड़ दिया है।




