दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बहुप्रतीक्षित लक्ष्मी योजना को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाएगी। सरकार के अनुसार, योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू होगी और पात्र लाभार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद रक्षा बंधन के अवसर पर पहली किस्त जारी की जाएगी। इस योजना के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में पर्याप्त बजट का प्रावधान किया है और लाखों महिलाओं को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि लक्ष्मी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे अधिक से अधिक पात्र महिलाएं आसानी से इसका लाभ उठा सकेंगी। योजना का लाभ केवल निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाली महिलाओं को ही मिलेगा और राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी।
कैबिनेट बैठक में आगामी कांवड़ यात्रा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने कांवड़ शिविरों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता राशि में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और शिविरों के संचालन पर बढ़ते खर्च को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत बड़े कांवड़ शिविरों को पहले की तुलना में अधिक अनुदान मिलेगा, जिससे भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता, बिजली और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से की जा सकेंगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजीकृत कांवड़ समितियों को पहले की तरह निर्धारित सीमा तक निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई जाएगी और अनुदान राशि पारदर्शी तरीके से DBT के माध्यम से जारी की जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और धार्मिक आयोजनों के बेहतर प्रबंधन, दोनों को समान प्राथमिकता दे रही है। उनके अनुसार, लक्ष्मी योजना से लाखों महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जबकि कांवड़ शिविरों के लिए बढ़ाई गई सहायता राशि से श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। सरकार का मानना है कि ये दोनों फैसले जनकल्याण और सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।




