हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का कामकाज, गृह मंत्री पर विपक्ष के निशाने

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संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के कारण बार-बार बाधित रही। विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग करते हुए उनके खिलाफ नारे लगाए। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सदन के वेल में पहुंच गए, जिसके चलते लोकसभा अध्यक्ष को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इसी तरह राज्यसभा में भी सभापति की बार-बार की अपील के बावजूद विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए और लगातार विरोध प्रदर्शन जारी रखा। अंततः दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और गृह मंत्री को सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में भी प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को दोहराया। दूसरी ओर, सरकार ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज में रुकावट पैदा करने का आरोप लगाया। सरकार का कहना है कि वह सभी अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलना आवश्यक है।

लगातार हंगामे के कारण संसद का निर्धारित एजेंडा प्रभावित हुआ और कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे नहीं हो सके। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद और बहस के माध्यम से ही समाधान निकलता है, जबकि विपक्ष का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा। अब सोमवार को संसद की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध समाप्त होता है या फिर हंगामे का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

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