आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की E-20 ईंधन नीति के खिलाफ अपना विरोध और तेज करने का फैसला किया है। उन्होंने मंगलवार को लगभग 100 समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लाखों नागरिकों के हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपने की भी योजना बनाई है। पार्टी का कहना है कि इस ज्ञापन में E-20 नीति पर पुनर्विचार करने, उपभोक्ताओं को E-20 और सामान्य पेट्रोल के बीच विकल्प उपलब्ध कराने तथा इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से बातचीत की मांग की जाएगी। आम आदमी पार्टी का दावा है कि इस अभियान के तहत देशभर से बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ है।
अरविंद केजरीवाल का आरोप है कि E-20 ईंधन नीति को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है, उससे करोड़ों वाहन मालिक प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि देश में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे वाहन चल रहे हैं जिन्हें पूरी तरह E-20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिना विकल्प दिए केवल E-20 ईंधन उपलब्ध कराना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल और E-20 दोनों प्रकार का ईंधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि वाहन मालिक अपने वाहन की क्षमता और आवश्यकता के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें।
इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने पिछले कुछ दिनों में जनसंपर्क अभियान भी चलाया है। पार्टी का कहना है कि विभिन्न राज्यों में हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से लाखों लोगों ने E-20 नीति पर अपनी चिंता जताई है। केजरीवाल का कहना है कि सरकार को इस नीति के आर्थिक, तकनीकी और उपभोक्ता हितों से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शिता के साथ जानकारी देनी चाहिए। उनका यह भी मानना है कि किसी भी बड़े बदलाव को लागू करने से पहले आम जनता और विशेषज्ञों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार का पक्ष है कि E-20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उद्देश्य देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना, प्रदूषण में कमी लाना और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि नीति के क्रियान्वयन से पहले वाहन मालिकों की व्यावहारिक समस्याओं और संभावित अतिरिक्त खर्च पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
प्रधानमंत्री आवास तक प्रस्तावित मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास उच्च सुरक्षा क्षेत्र में स्थित होने के कारण बिना अनुमति वहां प्रदर्शन या मार्च की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने अपने घोषित कार्यक्रम के अनुसार मार्च निकालने की बात दोहराई है। माना जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से पार्टी E-20 नीति को राष्ट्रीय राजनीतिक और जनहित के मुद्दे के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अभियान का राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है।




