उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग एक बार फिर चर्चा में है। शुक्रवार को लखनऊ के लोक भवन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव पर भी तंज कसा। मुख्यमंत्री ने बिना सीधे तौर पर नाम लिए कहा कि कुछ लोग उम्र बढ़ने के बावजूद जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं। इसी दौरान उन्होंने अखिलेश यादव का संदर्भ लेते हुए कहा कि ‘बबुआ भी यही करते थे।’ मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की दिनचर्या और काम करने के तरीके ऐसे रहे हैं, जिनसे प्रदेश की जनता की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सकता था। मुख्यमंत्री की टिप्पणी को अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल से जोड़कर देखा जा रहा है। योगी इससे पहले भी कई मौकों पर अखिलेश यादव को ‘बबुआ’ कहकर उनकी राजनीतिक कार्यशैली पर कटाक्ष करते रहे हैं। उनका कहना रहा है कि सत्ता में रहते हुए पिछली सरकार ने प्रदेश के विकास और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के बुनकरों, कारीगरों और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करना था। उत्तर प्रदेश में हथकरघा और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा रही है और बड़ी संख्या में परिवार इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। सरकार की ओर से पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने, कारीगरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कारीगरों के हित में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
हालांकि कार्यक्रम का विषय हथकरघा और कारीगरों से जुड़ा था, लेकिन मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान ने इसे सुर्खियों में ला दिया। योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच लंबे समय से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा है। दोनों नेता एक-दूसरे की सरकारों की नीतियों, कामकाज और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर सार्वजनिक मंचों से हमला करते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की ताजा टिप्पणी को भी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान के रूप में देखा जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ इससे पहले भी अखिलेश यादव की कार्यशैली को लेकर इसी तरह के तंज कस चुके हैं। जनवरी 2026 में लखनऊ में एक छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम के दौरान भी मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उनके मुख्यमंत्री रहते युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर सवाल उठाए थे। योगी ने उस समय पूर्व सरकार की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा था कि जिन लोगों के पास युवाओं और छात्रों के लिए समय नहीं था, वे आज उनकी समस्याओं की बात कर रहे हैं। इस तरह दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत शैली और शासन के मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार देखने को मिलती रही है।
पिछले कुछ महीनों में भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी और अखिलेश के बीच कई मुद्दों पर टकराव सामने आया है। महिलाओं और बेटियों के सम्मान से जुड़े एक विवाद के दौरान भी मुख्यमंत्री योगी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की बात कही थी। इस मुद्दे ने भी भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को बढ़ा दिया था।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। भाजपा जहां योगी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और विभिन्न सरकारी योजनाओं को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सरकार की नीतियों और कामकाज को लेकर सवाल उठाती रही है। ऐसे में दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली बयानबाजी का चुनावी राजनीति पर असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ताजा टिप्पणी भी इसी राजनीतिक माहौल में सामने आई है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में उन्होंने एक ओर जहां बुनकरों और कारीगरों के महत्व पर बात की, वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव पर ‘बबुआ’ वाली टिप्पणी कर राजनीतिक संदेश भी दिया। अब नजर इस बात पर रहेगी कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री के इस बयान का किस अंदाज में जवाब देते हैं। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।




