पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए नए रक्षा समझौते के बाद भारत की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे सामने आने लगे हैं। इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच बने नए सुरक्षा समीकरण का मुकाबला करने के लिए भारत इस्राइल के साथ एक नए रक्षा समझौते की तैयारी कर रहा है। यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुई, लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे फर्जी और भ्रामक बताया है।
विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेक इकाई ने 7 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पर प्रसारित एक रिपोर्ट का खंडन किया। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर दावा किया गया था कि भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते के जवाब में इस्राइल के साथ एक रक्षा संधि की दिशा में कदम बढ़ाया है। मंत्रालय ने इस दावे को तथ्यहीन बताते हुए लोगों को सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसी सामग्री से सावधान रहने की सलाह दी। मंत्रालय ने विशेष रूप से यह भी चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से फर्जी सामग्री तैयार कर उसे वास्तविक खबर के रूप में पेश किया जा सकता है।
दरअसल, यह पूरा मामला पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए नए रक्षा समझौते के बाद शुरू हुआ। तीनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से एक समझौते पर सहमति जताई है। समझौते के तहत यदि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है तो उसे तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। इसके अलावा समझौते का उद्देश्य आपसी रक्षा सहयोग, सैन्य समन्वय और सामूहिक सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना बताया गया है। इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के बदलते रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये समझौते के सामने आने के बाद भारत की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि भारत ने इस्राइल के साथ किसी नए रक्षा समझौते पर बातचीत शुरू कर दी है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसी किसी नई भारत-इस्राइल रक्षा संधि की जानकारी सरकार के पास नहीं है और वायरल दावा फर्जी है। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए समझौते के जवाब में भारत द्वारा इस्राइल के साथ कोई नया सैन्य गठबंधन बनाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 अगस्त की मीडिया ब्रीफिंग में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए घटनाक्रम पर भारत की स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है। हालांकि, भारत ने अभी तक इस समझौते के जवाब में किसी नए रक्षा गठबंधन या सैन्य संधि की घोषणा नहीं की है। इससे साफ है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय घटनाक्रम का आकलन कर रही है, लेकिन फिलहाल किसी जवाबी सैन्य समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच 6 अगस्त 2026 को फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत और इस्राइल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय सहयोग को विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह फोन कॉल इस्राइल की ओर से की गई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत को सोशल मीडिया पर चल रहे भारत-इस्राइल रक्षा समझौते के दावे से जोड़ दिया गया, लेकिन आधिकारिक जानकारी में ऐसी किसी नई रक्षा संधि का उल्लेख नहीं है।
भारत और इस्राइल के संबंध पहले से ही रणनीतिक स्तर पर मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा के अलावा तकनीक, कृषि, नवाचार और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग चलता है। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत होना द्विपक्षीय संबंधों का हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच हुई हालिया बातचीत को सीधे पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये समझौते के जवाब में किसी नए रक्षा गठबंधन की शुरुआत मानना सही नहीं होगा।
विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले में AI और सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली फर्जी सूचनाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण चेतावनी दी गई है। आज के दौर में किसी बयान, रिपोर्ट या तस्वीर को डिजिटल तकनीक की मदद से बदलकर या संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाया जा सकता है। इसलिए किसी भी बड़े रणनीतिक या कूटनीतिक दावे को आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करना जरूरी है।
कुल मिलाकर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुआ रक्षा समझौता क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों के लिए अहम घटनाक्रम है और भारत इस पर नजर रख रहा है। लेकिन इसके जवाब में भारत और इस्राइल के बीच किसी नई रक्षा संधि की खबर की विदेश मंत्रालय ने पुष्टि नहीं की है, बल्कि इसे स्पष्ट रूप से फर्जी दावा बताया है। भारत और इस्राइल के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से मौजूद है और दोनों देशों के नेताओं की हालिया बातचीत द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर केंद्रित थी। इसलिए फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर भारत-इस्राइल नई रक्षा संधि की वायरल खबर को तथ्य नहीं, बल्कि भ्रामक और फर्जी सूचना के तौर पर देखा जाना चाहिए।




