लखनऊ/देहरादून। उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे को अब हरिद्वार तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तराखंड कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस समझौते के बाद मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा। प्रस्तावित कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा और बिजनौर क्षेत्रों को जोड़ते हुए उत्तराखंड में हरिद्वार तक पहुंचेगा।
करीब 147 किलोमीटर का होगा नया विस्तार
गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार लिंक को लेकर पिछले कुछ समय से अलग-अलग स्तर पर तैयारी चल रही थी। मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक अमरोहा से हरिद्वार के बीच नया हिस्सा लगभग 146-147 किलोमीटर लंबा हो सकता है। इसमें बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में और करीब 30 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखंड में आने की योजना है। अप्रैल 2026 में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने इस प्रस्तावित विस्तार के लिए जमीन और गांवों से संबंधित रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
इस विस्तार का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि प्रस्तावित मार्ग को बिजनौर से होकर ले जाने की योजना है। इससे अभी तक बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से अपेक्षाकृत दूर रहे बिजनौर के कई इलाकों को तेज और नियंत्रित यातायात वाले मार्ग से जुड़ने का अवसर मिलेगा। क्षेत्र में प्रस्तावित अलाइनमेंट को लेकर स्थानीय स्तर पर किसानों की ओर से बदलाव की मांग भी सामने आ चुकी है, इसलिए आगे की प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण और अंतिम अलाइनमेंट महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।
यूपी और उत्तराखंड की क्या होगी भूमिका?
परियोजना को दो राज्यों से जोड़ने के कारण इसके निर्माण और वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर दोनों सरकारों के बीच समन्वय आवश्यक था। जुलाई में सामने आई जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड में बनने वाले हिस्से की निर्माण लागत वहन करने पर सहमति जताई थी। लगभग 30 किलोमीटर के उत्तराखंड हिस्से के निर्माण का खर्च उत्तर प्रदेश द्वारा उठाए जाने की बात सामने आई थी। अब उत्तराखंड कैबिनेट की मंजूरी के बाद दोनों राज्यों के बीच औपचारिक MoU की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
उत्तराखंड सरकार की मंजूरी को परियोजना के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। समझौते के जरिए दोनों राज्यों के बीच जमीन, निर्माण, प्रशासनिक समन्वय और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, भूमि संबंधी कार्रवाई और निर्माण की अगली तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है।
मेरठ से हरिद्वार की दूरी और समय होगा कम
गंगा एक्सप्रेसवे का मौजूदा मुख्य कॉरिडोर मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबा है। उत्तर प्रदेश की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को किया गया था। अब हरिद्वार लिंक के जरिए इस नेटवर्क को उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र से जोड़ने की योजना है।
प्रस्तावित विस्तार पूरा होने के बाद मेरठ से हरिद्वार की सड़क यात्रा में लगने वाला समय काफी कम होने की उम्मीद है। उत्तराखंड कैबिनेट की मंजूरी से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार मौजूदा लगभग तीन घंटे की यात्रा घटकर करीब 90 मिनट तक आ सकती है। हालांकि वास्तविक यात्रा समय मार्ग, यातायात और अंतिम डिजाइन पर निर्भर करेगा।
बिजनौर को मिलेगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क का फायदा
बिजनौर के लिए यह परियोजना विशेष महत्व रखती है। अमरोहा से हरिद्वार के बीच प्रस्तावित मार्ग में बिजनौर क्षेत्र को शामिल किए जाने से जिले के कई हिस्सों की पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
एक्सप्रेसवे के कारण कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही, माल परिवहन और स्थानीय कारोबार को फायदा मिल सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी नए अवसर पैदा होने की संभावना है। हालांकि इन आर्थिक लाभों का वास्तविक असर परियोजना के निर्माण, इंटरचेंज की स्थिति और स्थानीय कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगा।
धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
हरिद्वार देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्रों में शामिल है। यहां वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान सड़क यातायात पर भारी दबाव रहता है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से आने वाले यात्रियों के लिए वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध हो सकता है।
उत्तराखंड सरकार ने भी इस परियोजना को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ व्यापार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं से जोड़कर देखा है। नए सड़क कॉरिडोर से हरिद्वार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
भूमि अधिग्रहण और अलाइनमेंट पर रहेगी नजर
परियोजना के सामने अगली बड़ी चुनौती जमीन से संबंधित प्रक्रिया होगी। अप्रैल में UPEIDA ने प्रस्तावित मार्ग से जुड़े गांवों के राजस्व रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित विस्तार के लिए बड़ी संख्या में गांवों से संबंधित रिकॉर्ड और सर्वे की जरूरत है।
बिजनौर में प्रस्तावित अलाइनमेंट को लेकर किसानों की आपत्तियां और बदलाव की मांग भी सामने आई है। ऐसे में प्रशासन के लिए भूमि अधिग्रहण, प्रभावित परिवारों से संवाद और अंतिम मार्ग निर्धारण महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।
गंगा एक्सप्रेसवे का नेटवर्क होगा और बड़ा
गंगा एक्सप्रेसवे मूल रूप से मेरठ से प्रयागराज तक उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ने वाला बड़ा कॉरिडोर है। हरिद्वार विस्तार के बाद इसका नेटवर्क उत्तराखंड तक पहुंच जाएगा। इससे दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को एक व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए भी एक अलग ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,586 करोड़ रुपये बताई गई है और इसकी लंबाई लगभग 74.5 किलोमीटर होगी। इससे गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क की पश्चिमी दिशा में कनेक्टिविटी और मजबूत होने की उम्मीद है।
अब आगे क्या होगा?
उत्तराखंड कैबिनेट से MoU को मंजूरी मिलने के बाद दोनों राज्यों के बीच औपचारिक समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद परियोजना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं, भूमि संबंधी कार्रवाई तथा निर्माण की तैयारियों को गति दी जाएगी।
कुल मिलाकर हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार केवल दो राज्यों को जोड़ने वाली सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच तेज परिवहन, धार्मिक पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। यदि भूमि और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं निर्धारित गति से आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में बिजनौर समेत आसपास के क्षेत्रों के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।




