युवाओं के बीच क्यों नहीं चला कांग्रेस का अभियान? पेपर लीक मुद्दे पर थरूर का कबूलनामा

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प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बयान चर्चा में है। थरूर ने माना कि पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने भी आवाज उठाई, लेकिन पार्टी का विरोध प्रदर्शन उतना प्रभावी नहीं रहा, जितना CJP के नेतृत्व में चलाया गया युवा आंदोलन रहा। उन्होंने इस स्थिति को कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय बताया और संकेत दिया कि पार्टी को यह समझने की जरूरत है कि युवाओं के बीच उसका संदेश अपेक्षित प्रभाव क्यों नहीं पैदा कर सका।

थरूर के मुताबिक, जिन मुद्दों को लेकर CJP ने आंदोलन खड़ा किया, उनमें से कई मुद्दे कांग्रेस पहले से उठाती रही है। राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों, पेपर लीक और छात्रों की परेशानियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस अपने अभियान को उस स्तर तक जनसमर्थन नहीं दिला सकी, जिस तरह CJP का आंदोलन छात्रों और युवाओं के बीच पहुंच बनाने में सफल रहा। थरूर ने इस अंतर को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई और कहा कि किसी मुद्दे को उठाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

CJP का आंदोलन NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ था। आंदोलन के दौरान परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के हितों की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने जैसी मांगें प्रमुख रहीं। दिल्ली का जंतर-मंतर इस आंदोलन के प्रमुख केंद्रों में रहा। आंदोलन ने धीरे-धीरे व्यापक रूप लिया और बड़ी संख्या में छात्र तथा युवा इससे जुड़े। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

आंदोलन के दौरान संसद की ओर मार्च करने की कोशिश भी की गई, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। इस कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ। शशि थरूर ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया था। उन्होंने ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच की जरूरत पर भी जोर दिया था।

पेपर लीक के मुद्दे पर थरूर पहले भी सरकार से सवाल करते रहे हैं। उनका कहना रहा है कि परीक्षा में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं से छात्रों का व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित होता है। उनके अनुसार, केवल पेपर लीक के बाद दोषियों को सजा देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जरूरत ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जिसमें प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परीक्षा केंद्रों की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा तक सभी स्तरों पर मजबूत व्यवस्था हो, ताकि पेपर लीक की संभावना को पहले ही रोका जा सके।

थरूर की मौजूदा टिप्पणी कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी लंबे समय से बेरोजगारी, शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान में शामिल करती रही है। इसके बावजूद यदि कोई दूसरा संगठन उन्हीं मुद्दों को लेकर युवाओं के बीच ज्यादा प्रभाव पैदा करता है, तो यह कांग्रेस की रणनीति और संचार शैली पर सवाल खड़े करता है। थरूर का बयान इसी दिशा में पार्टी के भीतर आत्ममंथन की आवश्यकता की ओर इशारा करता है।

CJP आंदोलन की खास बात यह रही कि उसने सोशल मीडिया अभियान, जमीनी प्रदर्शन और युवाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी को एक साथ जोड़ने की कोशिश की। इससे आंदोलन को व्यापक चर्चा मिली और परीक्षा संबंधी मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए। कांग्रेस के सामने अब चुनौती यह है कि वह युवाओं के मुद्दों को केवल संसद या राजनीतिक सभाओं तक सीमित रखने के बजाय छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ सीधे संवाद के माध्यम से किस तरह प्रभावी तरीके से उठाती है।

पेपर लीक का मुद्दा अब केवल किसी एक परीक्षा या एक संगठन के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। यह छात्रों के भविष्य, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सरकारी संस्थानों में युवाओं के भरोसे से जुड़ा विषय बन चुका है। ऐसे में शशि थरूर की यह स्वीकारोक्ति कि कांग्रेस का प्रदर्शन CJP के आंदोलन जितना प्रभावी नहीं रहा, पार्टी के लिए एक राजनीतिक संदेश के साथ-साथ रणनीतिक चुनौती भी है। आने वाले समय में कांग्रेस युवाओं तक अपनी पहुंच और परीक्षा सुधार से जुड़े अभियानों को किस तरह आगे बढ़ाती है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

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