लाल किले की प्राचीर से PM Modi का संबोधन, 2047 के भारत के लिए ‘सप्त धारा’ पर जोर

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नई दिल्ली: भारत ने शनिवार, 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। यह प्रधानमंत्री के लगातार 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन का अवसर रहा। अपने भाषण में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया और आत्मनिर्भर, मजबूत तथा तकनीकी रूप से सक्षम भारत की रूपरेखा सामने रखी।

इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह की खास थीम ‘150 Years of Vande Mataram’ और ‘Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047’ रखी गई थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष लाल किले की प्राचीर से पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में विशेष अतिथि भी शामिल हुए।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को आजादी जिन आकांक्षाओं और संकल्पों के साथ मिली थी, उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। उन्होंने 2047, यानी आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्रमुखता से रखा।

प्रधानमंत्री के अनुसार, विकसित भारत की यात्रा केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकती। इसके लिए तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में एक साथ आगे बढ़ना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘शक्ति की सप्त धारा’ यानी Sapta Dhara का विचार सामने रखा, जिसे भारत की विकास यात्रा को गति देने वाली सात प्रमुख धाराओं के रूप में प्रस्तुत किया गया।

ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ऊर्जा सुरक्षा को आने वाले समय की महत्वपूर्ण जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास के लिए पर्याप्त और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति जरूरी है। उनके संबोधन में ऊर्जा के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिखाई दिया।

उन्होंने देश में पाइप से गैस पहुंचाने, सेमीकंडक्टर निर्माण और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने स्वदेशी उत्पादन और भारतीय ब्रांडों को वैश्विक पहचान दिलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

युवाओं को बताया विकसित भारत की ताकत

इस वर्ष के समारोह की थीम में ही युवा शक्ति और विकसित भारत@2047 को प्रमुख स्थान दिया गया था। प्रधानमंत्री ने युवाओं को भारत के भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार को देश की प्रगति से जोड़ने का आह्वान किया।

खास तौर पर खेलों के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने 2036 ओलंपिक को लेकर भारत की महत्वाकांक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2036 तक ओलंपिक की कम से कम तीन-चौथाई स्पर्धाओं में भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों की देशव्यापी प्रतिभा खोज शुरू करने की बात भी कही गई, ताकि छोटी उम्र में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया जा सके।

बच्चों से मुलाकात ने खींचा ध्यान

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों से भी मुलाकात की और उनसे संवाद किया। समारोह में बच्चों की भागीदारी को युवा भारत की तस्वीर के तौर पर देखा गया। इस दौरान बच्चों के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत और उनका उत्साह बढ़ाने के दृश्य सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में भी चर्चा का विषय बने।

बच्चों और युवाओं को समारोह में प्रमुखता देना इस वर्ष की ‘Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047’ थीम से भी जुड़ा रहा। सरकार की ओर से 2047 के भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी को सक्रिय भागीदार बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

गरीबी कम होने और आर्थिक प्रगति का दावा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में पिछले वर्षों में हुए आर्थिक और सामाजिक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में प्रमुख स्थान पर पहुंचा है।

उन्होंने पाइप से पानी और गैस कनेक्शन, बुनियादी ढांचे, मेट्रो नेटवर्क और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में हुए विस्तार को भी भारत की बदलती तस्वीर से जोड़कर प्रस्तुत किया।

‘वंदे मातरम्’ बना समारोह का विशेष आकर्षण

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का विशेष महत्व रहा। सरकार के अनुसार, लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति की गई। प्रधानमंत्री ने भी अपने संबोधन में देश की एकता और राष्ट्रीय भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि हर भारतीय के दिल में ‘वंदे मातरम्’ की भावना गूंज रही है।

यह पहल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका और उसके राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करने के लिए आयोजित इस वर्ष की विशेष थीम से जुड़ी रही।

बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना

प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को सहायता और पुनर्वास के लिए सरकार के सहयोग का भरोसा दिलाया।

इस संदेश के जरिए प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय उत्सव के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मुश्किलों को भी अपने संबोधन में जगह दी।

नक्सलवाद पर भी प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है और सुरक्षा बलों के बलिदान को याद किया। साथ ही उन्होंने वैचारिक स्तर पर देश को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों के प्रति भी सतर्क रहने की बात कही।

2047 का भारत कैसा होगा?

प्रधानमंत्री के भाषण का व्यापक संदेश यह रहा कि 2047 का विकसित भारत केवल सरकार की योजनाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी, युवाओं की क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और मजबूत अर्थव्यवस्था से तैयार होगा। उन्होंने भारत को ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, उद्योग, खेल और तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत बनाने की दिशा पर जोर दिया।

स्वतंत्रता दिवस समारोह के मंच से प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सामने एक ऐसा भारत बनाने का लक्ष्य रखा जिसमें आर्थिक शक्ति के साथ सामाजिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी क्षमता और युवा प्रतिभा भी विकास के केंद्र में हो। इस तरह 15 अगस्त 2026 का संबोधन 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य और युवा शक्ति को उसके केंद्र में रखने वाले संदेश के रूप में सामने आया।

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