झारखंड में छात्रों का सरकार के खिलाफ मोर्चा, CM हेमंत सोरेन के आवास घेराव की तैयारी

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झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। लंबे समय से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी अब सरकार पर सीधे दबाव बनाने की तैयारी में हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रांची में छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकाली और इसी दौरान 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के घेराव का ऐलान किया गया। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

JPSC-JSSC सुधार मोर्चा और अन्य छात्र संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी पिछले कई सप्ताह से रांची में प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में ऐसी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनसे मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े हुए हैं। आंदोलनकारी विशेष रूप से 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL समेत कुछ अन्य परीक्षाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। छात्रों की मांग है कि जिन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए।

15 अगस्त को आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकाली। बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ नारे लगाए और सरकार से उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी के लिए कई वर्षों तक तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही अन्याय है। उनका यह भी तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठने से युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कमजोर होता है।

छात्रों के आंदोलन के दौरान 10 अगस्त को स्थिति उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गई थी, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। हालात बिगड़ने पर पुलिस की ओर से आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठी के इस्तेमाल की खबर सामने आई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। छात्रों की ओर से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और मामले की CBI जांच कराने जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।

आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हुईं। विपक्षी दलों के नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया और सरकार पर परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। 10 अगस्त को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा के कुछ नेताओं को मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। विपक्ष ने इसे छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास बताया, जबकि सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया।

छात्रों के दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। सरकार की ओर से दो अन्य JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की जानकारी दी गई। इस कदम को छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक पर कार्रवाई के रूप में देखा गया, लेकिन इसके बाद भी आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। छात्रों का कहना है कि विवाद केवल कुछ परीक्षाओं को रद्द करने से खत्म नहीं होगा। वे भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और परीक्षा प्रणाली में स्थायी पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की मेहनत को भ्रष्टाचार, माफिया या परीक्षा में गड़बड़ी के कारण नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं को गंभीर चुनौती बताते हुए परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करने की बात कही। सरकार की ओर से नियमित परीक्षा कैलेंडर, OMR आधारित परीक्षा प्रक्रिया और तकनीकी सुधार जैसे कदमों पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार ने छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘Students Voice with Students’ अभियान शुरू करने की बात भी कही है। इसका उद्देश्य परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सुझाव लेना है। सरकार का मानना है कि भर्ती व्यवस्था में सुधार केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि युवाओं की राय और अनुभव को शामिल करके अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

इधर, 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को देखते हुए रांची प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कांके रोड स्थित आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पहले से कड़ी की जा चुकी है। संभावित प्रदर्शन को देखते हुए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासन के लिए चुनौती यह होगी कि छात्रों के प्रदर्शन के अधिकार और शहर की कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

हालांकि आंदोलन के कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग समय पर छात्र संगठनों की ओर से अलग-अलग बयान भी सामने आए हैं। आंदोलन के एक चरण में JPSC-JSSC सुधार मोर्चा ने मुख्यमंत्री आवास के तत्काल घेराव की किसी योजना से इनकार किया था और कहा था कि भविष्य के कार्यक्रम की जानकारी अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से दी जाएगी। बाद में 15 अगस्त को 20 अगस्त के घेराव की घोषणा किए जाने की खबर सामने आई। इसलिए आगामी कार्यक्रम के स्वरूप और उसमें शामिल होने वाले संगठनों की स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।

JPSC-JSSC विवाद अब केवल किसी एक परीक्षा के आयोजन या परिणाम तक सीमित नहीं रह गया है। यह झारखंड में सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता, युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। छात्रों की ओर से CBI जांच और व्यापक सुधार की मांग लगातार उठाई जा रही है, जबकि सरकार परीक्षा व्यवस्था में बदलाव और निष्पक्षता का भरोसा दे रही है।

अब 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव पर सभी की नजर है। यदि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति बनती है, तो आंदोलन को शांत करने का रास्ता निकल सकता है। लेकिन यदि छात्रों को लगता है कि उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी यह विवाद सरकार और आंदोलनकारी छात्रों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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