आतंकवाद पर भारत की नीति को SCO का समर्थन? घोषणापत्र में दोहरे मापदंड पर क्या कहा गया

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शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ सदस्य देशों ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया कि आतंकवाद से मुकाबले में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत SCO के सदस्य देशों के नेताओं ने आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के बाद जारी घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की गई और सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने का आह्वान किया गया। भारत के लिए यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ बिना भेदभाव और बिना राजनीतिक सुविधा के कार्रवाई की मांग करता रहा है।

SCO घोषणापत्र में सदस्य देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण तथा अन्य सहायता नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। घोषणा में यह संदेश भी दिया गया कि किसी आतंकवादी संगठन या गतिविधि को राजनीतिक या रणनीतिक हितों के आधार पर अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। आतंकवाद का मुकाबला तभी प्रभावी हो सकता है जब सभी देशों के लिए एक समान मानदंड लागू हो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी SCO मंच से आतंकवाद के खिलाफ भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी देश की रणनीतिक नीति या राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने का साधन नहीं बनाया जा सकता। भारत का जोर केवल आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद को धन, प्रशिक्षण, हथियार, सुरक्षित ठिकाने और प्रचार उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद की जड़ों और उसके समर्थन तंत्र पर एक साथ कार्रवाई करने की अपील करता रहा है। SCO में दिया गया यह संदेश इसी नीति को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

भारत के लिए इस घोषणा का एक महत्वपूर्ण पहलू सीमा पार आतंकवाद से जुड़ा है। नई दिल्ली का मानना है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में संरक्षण या समर्थन देने की कोशिश क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे में SCO जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन के घोषणापत्र में दोहरे मानदंड को अस्वीकार करने की बात भारत की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंच पर मजबूती देती है। भारत की कोशिश रही है कि आतंकवाद पर चर्चा करते समय केवल हमले करने वाले संगठनों पर नहीं, बल्कि उन्हें वित्तीय, राजनीतिक और लॉजिस्टिक सहायता देने वाले नेटवर्क पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।

SCO के आतंकवाद विरोधी ढांचे में Regional Anti-Terrorist Structure यानी RATS की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह संगठन के सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से संबंधित सूचनाओं और सहयोग को बढ़ाने का प्रमुख तंत्र है। भारत इस व्यवस्था के माध्यम से आतंकवाद विरोधी सहयोग को और प्रभावी बनाने की वकालत करता रहा है। घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक और समन्वित प्रयासों पर जोर दिए जाने से SCO की सुरक्षा संबंधी भूमिका को और महत्व मिलने की संभावना है।

शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया और ईरान से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुख रहा। SCO सदस्य देशों ने क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। संगठन ने संघर्षों को सैन्य रास्ते से आगे बढ़ाने के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान खोजने की जरूरत पर जोर दिया। SCO का यह रुख अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देशों की संप्रभुता के सम्मान की बात के साथ जोड़ा गया। इस मुद्दे पर संगठन ने ऐसी भाषा अपनाई, जिससे अलग-अलग सदस्य देशों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को लेकर भी SCO का रुख महत्वपूर्ण रहा। संगठन के सदस्य देशों ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के दायरे में स्वीकार करने की बात कही। इसका मतलब यह है कि SCO ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक और कानूनी रास्ते को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। हालांकि, इसे यह कहने के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा कि SCO ने ईरान की हर नीति या हर कार्रवाई का समर्थन किया है।

यही कारण है कि यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या भारत ईरान के साथ खड़ा दिखाई दिया। भारत ने पश्चिम एशिया के संकट पर अपना संतुलित और स्वतंत्र कूटनीतिक रुख कायम रखा है। भारत ईरान के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रखता है, लेकिन साथ ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भी उसके महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। इसलिए भारत का रुख किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय क्षेत्रीय तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति को बढ़ावा देने तथा अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने पर केंद्रित रहा है।

ईरान भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह भारत को ईरान के रास्ते अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में किसी बड़े सैन्य संघर्ष का असर तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों पर पड़ सकता है। इसलिए भारत क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में है। ईरान से जुड़े SCO के रुख में भारत की भागीदारी को इसी व्यापक कूटनीतिक दृष्टिकोण के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

SCO घोषणापत्र में ईरान पर हुए हमलों की आलोचना के बावजूद अमेरिका और इजरायल को सीधे नाम लेकर निशाना बनाने से परहेज किया गया। इसे संगठन की सामूहिक और कूटनीतिक भाषा का हिस्सा माना जा सकता है। SCO में भारत, चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं और इन सभी के पश्चिमी देशों के साथ संबंध एक जैसे नहीं हैं। इसलिए संगठन ने किसी एक देश को सीधे निशाना बनाने के बजाय अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता, क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक समाधान जैसे व्यापक सिद्धांतों पर जोर दिया।

SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी का आतंकवाद पर दिया गया संदेश भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवाद को लेकर लंबे समय से मतभेद हैं। ऐसे समय में जब SCO के मंच पर दोनों देशों के नेता मौजूद थे, भारत की ओर से आतंकवाद पर दोहरे मानदंड को अस्वीकार करने का संदेश नई दिल्ली की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। भारत चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्रीय मंचों पर एक समान नीति अपनाई जाए और किसी देश या संगठन के साथ राजनीतिक सुविधा के आधार पर अलग-अलग व्यवहार न हो।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति से जुड़ा मुद्दा नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, जबकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इस क्षेत्र से जुड़ा है। यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए भारत के लिए पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

SCO का यह शिखर सम्मेलन संगठन की बदलती भूमिका को भी दर्शाता है। संगठन पारंपरिक रूप से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित रहा है, लेकिन अब आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत के लिए SCO मध्य एशिया और यूरेशिया के देशों के साथ संवाद बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में आतंकवाद और क्षेत्रीय संघर्षों पर संगठन का सामूहिक रुख भारत की विदेश नीति के लिए खास महत्व रखता है।

कुल मिलाकर, SCO घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंड को अस्वीकार करने का संदेश भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं के अनुरूप है। संगठन ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है, जबकि ईरान और पश्चिम एशिया के मामले में सैन्य टकराव के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की वकालत की है। ईरान के मुद्दे पर SCO का रुख तेहरान के प्रति समर्थन वाला जरूर दिखाई देता है, लेकिन इसे किसी सैन्य गठबंधन या ईरान की सभी नीतियों के समर्थन के रूप में देखना सही नहीं होगा। भारत ने भी इस व्यापक रुख के साथ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। सम्मेलन का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में किसी भी तरह की चयनात्मकता स्वीकार नहीं की जानी चाहिए और क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से खोजा जाना चाहिए।

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