मिलावटखोरों की बढ़ेगी मुश्किल, AI की मदद से FSSAI पहले पहचानेगा संदिग्ध मामले

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देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर लगाम लगाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) जांच व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। AI की मदद से खाद्य सुरक्षा से जुड़े बड़े पैमाने पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर उन उत्पादों, कारोबारियों या क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां खाद्य मानकों के उल्लंघन का जोखिम अधिक है। इसका उद्देश्य जांच को केवल सामान्य सैंपलिंग तक सीमित रखने के बजाय जोखिम आधारित और अधिक लक्षित बनाना है।

मौजूदा समय में खाद्य सुरक्षा अधिकारी विभिन्न स्थानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजते हैं। प्रस्तावित तकनीक आधारित व्यवस्था में पुराने जांच परिणामों, खाद्य उत्पादों, कारोबारियों, इलाकों और पहले सामने आए उल्लंघनों से संबंधित आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है। AI इन आंकड़ों में मौजूद पैटर्न को पहचानकर अधिकारियों को यह समझने में सहायता कर सकता है कि किन जगहों या उत्पादों में गड़बड़ी की आशंका अपेक्षाकृत ज्यादा है। इससे जांच अधिकारियों को अपनी प्राथमिकताएं तय करने और उपलब्ध संसाधनों को अधिक जोखिम वाले मामलों पर केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।

खाद्य सुरक्षा को लेकर देश में निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई पहले से तेज हुई है। हाल की रिपोर्टों में बताया गया है कि वर्ष 2020 से हर साल एक लाख से अधिक खाद्य नमूनों की जांच की गई है और इनमें लगभग पांचवां हिस्सा असुरक्षित या गलत लेबलिंग जैसी समस्याओं से जुड़ा पाया गया। ऐसे आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि देश में खाद्य सुरक्षा की निगरानी के लिए बड़ी मात्रा में डेटा उपलब्ध है। इसी डेटा को तकनीक की मदद से व्यवस्थित और विश्लेषित करके भविष्य की जांच रणनीति तैयार करने की कोशिश की जा सकती है।

हाल में खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और लेबल से जुड़े मामलों ने भी नियामक एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। महाराष्ट्र में हुई एक कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर ब्रांडेड खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग, निर्माण तिथि और पोषण संबंधी जानकारी में बदलाव किए जाने का मामला सामने आया। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा की निगरानी केवल उत्पाद के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखना भी जरूरी है। AI आधारित डेटा विश्लेषण भविष्य में ऐसी निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकता है।

हालांकि, AI को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का विकल्प नहीं माना जा रहा है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अधिकारियों को निर्णय लेने में सहायता देने वाले उपकरण के रूप में किया जा सकता है। किसी खाद्य पदार्थ में वास्तव में मिलावट है या वह स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित है, इसका अंतिम फैसला निर्धारित वैज्ञानिक परीक्षण और नियामकीय प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। AI संभावित जोखिम वाले मामलों की पहचान करके अधिकारियों को यह संकेत दे सकता है कि किन स्थानों या उत्पादों की पहले जांच की जानी चाहिए।

FSSAI के विभिन्न दस्तावेजों में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी नई तकनीकों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है। AI को खाद्य परीक्षण और इंस्ट्रूमेंटल एनालिसिस जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ने पर जांच की दक्षता और सटीकता बढ़ाने की संभावनाएं भी सामने आई हैं। इससे संकेत मिलता है कि भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे पारंपरिक निरीक्षण मॉडल से डेटा और तकनीक आधारित निगरानी की ओर बढ़ रही है।

खाद्य सुरक्षा की चुनौती अब केवल दुकानों, होटल और कारखानों तक सीमित नहीं रह गई है। ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के विस्तार के कारण बड़ी मात्रा में पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ ऑनलाइन भी बेचे जा रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध खाद्य उत्पादों की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है। FSSAI की ओर से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खाद्य सुरक्षा नियमों की निगरानी और अनुपालन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। भविष्य में डिजिटल डेटा और AI आधारित विश्लेषण इस क्षेत्र में भी नियामकीय निगरानी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

AI आधारित जोखिम मूल्यांकन प्रणाली लागू होने पर खाद्य सुरक्षा जांच की पूरी प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है। अधिकारियों को संभावित रूप से पहले से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संदिग्ध उत्पादों या क्षेत्रों की जानकारी मिल सकेगी। इससे बिना किसी स्पष्ट प्राथमिकता के बड़े पैमाने पर सैंपल लेने के बजाय उन स्थानों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा, जहां जोखिम का स्तर ज्यादा है। इससे समय और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होने के साथ-साथ गंभीर मामलों पर तेजी से कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता केवल AI तकनीक पर निर्भर नहीं करेगी। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले और विश्वसनीय डेटा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और मजबूत नियामकीय व्यवस्था की भी आवश्यकता होगी। AI द्वारा दिए गए संकेतों को वैज्ञानिक परीक्षण और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के साथ जोड़ना जरूरी होगा, ताकि केवल तकनीकी अनुमान के आधार पर किसी कारोबारी या उत्पाद के खिलाफ कार्रवाई न हो।

कुल मिलाकर, FSSAI की तकनीक आधारित पहल भारत में खाद्य सुरक्षा जांच के तरीके को अधिक डेटा-आधारित और जोखिम केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अगर AI का इस्तेमाल सही डेटा, मजबूत प्रयोगशाला नेटवर्क और प्रशिक्षित अधिकारियों के साथ किया जाता है, तो खाद्य मिलावट और नियमों के उल्लंघन की संभावित घटनाओं की पहचान पहले करने में मदद मिल सकती है। इससे खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा करने की उम्मीद है।

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