‘कांग्रेस अल्ट्रा-लेफ्ट की ओर बढ़ रही’, हामिद अंसारी के बयान पर भाजपा का हमला

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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक हालिया बयान को लेकर भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान अंसारी ने भारत में राष्ट्रवाद, सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की पुस्तक The RSS: A Menace to India का संदर्भ देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी एक टिप्पणी का उल्लेख किया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक दिशा पर कई सवाल उठाए।

कार्यक्रम के दौरान हामिद अंसारी ने ए.जी. नूरानी के लेखन और उनके राजनीतिक-सामाजिक विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने नूरानी की पुस्तक के संदर्भ में नेहरू से जुड़ी उस टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को भारत के लिए साम्यवाद से बड़ी चुनौती बताया गया था। अंसारी ने नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया। उनके वक्तव्य का व्यापक संदर्भ भारत में धर्म, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को लेकर चल रही बहस से जुड़ा था।

हामिद अंसारी के इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला किया। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे ‘मुस्लिम लीग-माओवादी कांग्रेस’ तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति अब पहले की तुलना में अधिक ‘अल्ट्रा-लेफ्ट’ दिशा की ओर बढ़ रही है। त्रिवेदी ने अंसारी के बयान को कांग्रेस की वैचारिक राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि इससे पार्टी के वर्तमान राजनीतिक रुख को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

भाजपा नेता ने हामिद अंसारी को लेकर ‘बधाई’ शब्द का इस्तेमाल भी राजनीतिक तंज के तौर पर किया। भाजपा का कहना है कि अंसारी द्वारा नेहरू से जुड़े विचारों का उल्लेख किए जाने से कांग्रेस की वर्तमान विचारधारा और उसके पुराने राजनीतिक दृष्टिकोण के बीच संबंध पर चर्चा जरूरी हो गई है। हालांकि, ‘मुस्लिम लीग-माओवादी कांग्रेस’ और ‘अल्ट्रा-लेफ्ट’ जैसे शब्द भाजपा की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा हैं, इन्हें कांग्रेस की आधिकारिक पहचान या स्वयं पार्टी द्वारा स्वीकार की गई विचारधारा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस विवाद में भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वर्ष 2023 के एक बयान को भी सामने रखा। अमेरिका के दौरे के दौरान राहुल गांधी से केरल की राजनीति में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी IUML के साथ कांग्रेस के गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में राहुल गांधी ने IUML को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष पार्टी बताया था और कहा था कि उसमें कुछ भी गैर-धर्मनिरपेक्ष नहीं है। भाजपा अब इसी पुराने बयान का हवाला देते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठा रही है।

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस बयान को हामिद अंसारी के हालिया वक्तव्य के साथ जोड़ते हुए कांग्रेस पर वैचारिक रूप से अधिक वामपंथी और अल्पसंख्यक-केंद्रित राजनीति करने का आरोप लगाया। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस के नेताओं के अलग-अलग बयानों को एक साथ देखने पर पार्टी की राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल उठते हैं। दूसरी ओर, इन टिप्पणियों को भाजपा की राजनीतिक व्याख्या के रूप में देखना जरूरी है और इन्हें कांग्रेस की ओर से स्वीकार किए गए निष्कर्ष के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

हामिद अंसारी के बयान पर भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक और धार्मिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने उनके बयान से दूरी बनाते हुए धार्मिक सद्भाव और सामाजिक शांति पर जोर दिया। वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अंसारी का बचाव किया। उन्होंने अंसारी के लंबे प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव तथा उनकी विद्वता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन उनकी सार्वजनिक भूमिका और योगदान को अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हामिद अंसारी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों से सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक गरिमा और जिम्मेदारी बनाए रखने की अपेक्षा होती है। इस तरह हामिद अंसारी के बयान को लेकर राजनीतिक बहस भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंच गई है।

पूरे विवाद को समझने के लिए हामिद अंसारी के बयान के मूल संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। उनका वक्तव्य ए.जी. नूरानी के लेखन और भारत में राष्ट्रवाद तथा सांप्रदायिकता से जुड़ी बहस के संदर्भ में आया था। वहीं भाजपा ने इसी बयान को कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक विचारधारा और राहुल गांधी के पुराने बयान से जोड़कर राजनीतिक हमला किया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में नेहरू की विरासत, हिंदू राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक और नागरिक राष्ट्रवाद तथा धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर बहस को तेज कर दिया है।

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