नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के दोनों महान नेताओं के जीवन, उनके विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई प्रमुख नेताओं ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों राष्ट्रीय नेताओं के योगदान को स्मरण किया गया और उनके आदर्शों को सार्वजनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
संसद में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम की एक खास बात स्कूली बच्चों की भागीदारी रही। बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी कार्यक्रम में शामिल हुए। बच्चों को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका तथा देश के निर्माण में उनके योगदान को करीब से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी समेत कुछ नेताओं ने बच्चों से बातचीत भी की। नेताओं और बच्चों के बीच हुई बातचीत ने कार्यक्रम को एक सहज और जीवंत रूप दिया।
महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर उनके सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े विचारों को भी याद किया गया। गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके विचार भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में अहिंसक संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में चर्चा का विषय रहे हैं। हर वर्ष 2 अक्टूबर को देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उनके जीवन और संदेश को याद किया जाता है।
वहीं, लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी 2 अक्टूबर को ही मनाई जाती है। शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और आजादी के बाद देश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में वह भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने। शास्त्री को उनकी सादगी, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में अनुशासन के लिए याद किया जाता है। उनके नेतृत्व के दौर में दिया गया ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश आज भी व्यापक रूप से उद्धृत किया जाता है।
गांधी और शास्त्री दोनों की जयंती एक ही दिन होने के कारण 2 अक्टूबर भारतीय सार्वजनिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। एक ओर महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के विचारों को याद किया जाता है, वहीं दूसरी ओर लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा को स्मरण किया जाता है। संसद में आयोजित कार्यक्रम में भी इन दोनों नेताओं की विरासत को सम्मान दिया गया।
इस अवसर पर देशभर में स्कूलों, सरकारी संस्थानों और विभिन्न संगठनों की ओर से भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों ने प्रार्थना सभाओं, भाषणों, सांस्कृतिक गतिविधियों और स्वच्छता अभियानों में हिस्सा लिया। इस तरह गांधी और शास्त्री जयंती का आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नई पीढ़ी को दोनों नेताओं के जीवन और विचारों से परिचित कराने का माध्यम भी बना।




