मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक बार फिर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त में थोड़ी भी शर्म बची है तो उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ऐसे फैसलों और आदेशों को लागू कर रहे हैं, जिनसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां के हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में दिए गए भाषण का संदर्भ साझा किया। उन्होंने इसी के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को अब अपने पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए। रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों को लागू करने की उनकी भूमिका ने उन्हें देश के लिए बोझ बना दिया है। हालांकि, ये जयराम रमेश द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा प्रमुख है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि यदि इस प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए तो बड़ी संख्या में वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इससे लोगों के मतदान के संवैधानिक अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
वहीं, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूचियों को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने की प्रक्रिया के तौर पर देखता है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों को शामिल करना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है। आयोग ने SIR को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करना है। इस तरह SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मूल विवाद प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और चुनावी सूची की शुद्धता को लेकर है।
जयराम रमेश ने अपने बयान में न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने मताधिकार के महत्व पर जोर दिया था। हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति भुइयां ने व्यापक संवैधानिक संदर्भ में कहा था कि यदि किसी प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो जाते हैं, तो ऐसी स्थिति गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े कर सकती है। कांग्रेस ने इस टिप्पणी को SIR से जुड़े अपने तर्क के समर्थन में इस्तेमाल किया है। हालांकि, न्यायमूर्ति भुइयां की टिप्पणी को सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी न्यायिक निष्कर्ष या व्यक्तिगत दोष के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध पिछले कुछ समय में और मुखर हुआ है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसके लिए चुनावी प्रक्रिया में अधिकतम पारदर्शिता होनी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने कई मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई है। कुछ रिपोर्टों में आयोग के अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता पंजीकरण, चुनावी डेटा और तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों पर सवाल या सुझाव दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन घटनाओं को संस्थागत मतभेद के रूप में पेश किए जाने से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि किसी भी संवैधानिक संस्था में निर्णय लेने की प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों की ओर से सवाल, सुझाव और प्रशासनिक टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी विरोध सड़कों तक भी पहुंच चुका है। दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए गए। एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिसकर्मियों पर कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन आरोपों की जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को दिए जाने की खबर सामने आई। इस घटना ने भी चुनाव आयोग और SIR से जुड़े राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया।
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। पार्टी का आरोप है कि मौजूदा परिस्थितियों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। इसी आधार पर जयराम रमेश सहित कांग्रेस के कई नेता उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं और फैसलों का बचाव कर रहा है तथा SIR को मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद बता रहा है।
फिलहाल ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के हमले और चुनाव आयोग के SIR संबंधी रुख के बीच राजनीतिक विवाद जारी है। इस पूरे मामले में एक तरफ विपक्ष मतदाता अधिकार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ आयोग मतदाता सूची के शुद्धिकरण और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर जोर दे रहा है। ऐसे में आने वाले समय में SIR को लेकर होने वाली न्यायिक सुनवाई, चुनाव आयोग के अगले कदम और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।




