जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर स्थित वायुसेना स्टेशन पर आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ में भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं और आधुनिक सैन्य तकनीक का प्रदर्शन देखने को मिला। शनिवार, 10 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस महत्वपूर्ण सैन्य आयोजन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय वायुसेना और मित्र देशों की वायु सेनाओं की भागीदारी वाले अभ्यास का जायजा लिया। इस आयोजन में विभिन्न देशों के आधुनिक लड़ाकू विमानों और सहायक सैन्य विमानों की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया है। अमेरिकी एफ-35, फ्रांसीसी राफेल और संयुक्त अरब अमीरात के एफ-16 जैसे विमानों की भागीदारी के कारण यह अभ्यास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तरंग शक्ति-2026 का आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और मित्र देशों की वायु सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता विकसित करना और आधुनिक हवाई युद्ध से जुड़े अनुभव साझा करना है। इस अभ्यास के माध्यम से विभिन्न देशों के पायलटों और सैन्य अधिकारियों को एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण प्रणालियों और तकनीकी क्षमताओं को समझने का अवसर मिल रहा है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ऐसे संयुक्त अभ्यास सैन्य तैयारियों को मजबूत बनाने और विभिन्न देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जोधपुर एयरबेस का दौरा भारतीय वायुसेना की क्षमताओं और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने अभ्यास के समापन अवसर पर अपने संबोधन में भारतीय वायुसेना और इसमें भाग लेने वाले मित्र देशों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन भारत की वायु शक्ति की प्रगति को समझने और साझेदार देशों के साथ सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे अभ्यासों से प्राप्त अनुभव भविष्य में सैन्य प्रशिक्षण, परिचालन योजनाओं और रक्षा क्षमताओं के विकास में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इस वर्ष तरंग शक्ति में भारत के साथ अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इन देशों की भागीदारी अभ्यास को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देती है। विभिन्न वायु सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण से न केवल पायलटों को अपने कौशल का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है, बल्कि उन्हें अलग-अलग विमानों और परिचालन प्रणालियों के साथ तालमेल स्थापित करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है। इस तरह के आयोजन सैन्य अधिकारियों के बीच संवाद और आपसी समझ बढ़ाने में भी मदद करते हैं।
तरंग शक्ति-2026 में शामिल आधुनिक विमानों में अमेरिकी एफ-35 लाइटनिंग-2 विशेष रूप से चर्चा में है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बचने की क्षमता, आधुनिक सेंसर और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणालियों के लिए जाना जाता है। दूसरी ओर, फ्रांस का राफेल बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसका इस्तेमाल हवाई सुरक्षा और विभिन्न सामरिक अभियानों में किया जा सकता है। भारतीय वायुसेना भी राफेल विमानों का संचालन करती है। संयुक्त अरब अमीरात के एफ-16 लड़ाकू विमानों की भागीदारी भी अभ्यास को महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि इस प्रकार के विमान दुनिया की कई वायु सेनाओं में इस्तेमाल किए जाते हैं।
इस अभ्यास में लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन और हवा में ईंधन भरने की क्षमता वाले विमानों की भागीदारी भी अहम है। ए400एम, सी-130, सी-130जे, एमआरटीटी और केसी-30ए जैसे विमान सैन्य अभियानों के लिए जरूरी सहायक क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। आधुनिक हवाई अभियान केवल लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता पर निर्भर नहीं करते, बल्कि उनमें सैनिकों और उपकरणों को तेजी से पहुंचाना, लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले विमानों को ईंधन उपलब्ध कराना और विभिन्न सैन्य संसाधनों के बीच समन्वय स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होता है। इस तरह के अभ्यास से इन सभी क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझने और उनके बीच तालमेल विकसित करने में मदद मिलती है।
भारतीय वायुसेना के लिए तरंग शक्ति-2026 का एक प्रमुख लाभ मित्र देशों की प्रशिक्षण पद्धतियों और परिचालन अनुभवों से सीखने का अवसर है। संयुक्त अभ्यास के दौरान पायलटों को विभिन्न परिस्थितियों में मिशन की योजना बनाने, संचार व्यवस्था का उपयोग करने और दूसरे देशों के विमानों के साथ तालमेल स्थापित करने का अनुभव मिलता है। इसके अलावा, मिशन योजनाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों और जमीन पर परिचालन सहायता देने वाले कर्मियों के बीच भी समन्वय बढ़ता है। आधुनिक हवाई युद्ध में निगरानी, संचार, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बहुराष्ट्रीय अभ्यास वायु सेनाओं को अपनी तैयारियों का आकलन करने और नई परिचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
तरंग शक्ति-2026 का आयोजन केवल लड़ाकू विमानों की उड़ानों और सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। इसके दौरान पेशेवर संवाद, विशेष सेमिनार, औद्योगिक भ्रमण और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विदेशी सैन्य प्रतिनिधियों को भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र से परिचित होने का अवसर मिलता है। साथ ही, विभिन्न देशों के सैन्य अधिकारियों और कर्मियों के बीच व्यक्तिगत संपर्क मजबूत होता है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग में ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से सैन्य प्रशिक्षण के अलावा तकनीकी अनुभव, परिचालन रणनीतियों और रक्षा उद्योग से जुड़े विचारों का भी आदान-प्रदान किया जा सकता है।
इस अभ्यास के जरिए भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और आत्मनिर्भरता के प्रयासों को भी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत लगातार लड़ाकू विमानों, रडार प्रणालियों, मिसाइलों और अन्य रक्षा उपकरणों के विकास में घरेलू उद्योग की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। स्वदेशी तकनीक के विकास से सैन्य जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने और देश के रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। आधुनिक सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी विकास, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत रक्षा उत्पादन क्षमता को महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
26 सितंबर को शुरू हुआ तरंग शक्ति-2026 अभ्यास 12 अक्टूबर तक निर्धारित है। वर्ष 2024 में आयोजित पहले संस्करण के बाद इसका दूसरा संस्करण भारत की बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों की श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस आयोजन से भारत को अपनी वायु शक्ति का प्रदर्शन करने, मित्र देशों के साथ परिचालन तालमेल बढ़ाने और आधुनिक हवाई अभियानों से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर मिला है। जोधपुर एयरबेस पर आयोजित यह अभ्यास बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की रक्षा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे प्राप्त अनुभव भविष्य में संयुक्त प्रशिक्षण, सैन्य योजना और वायुसेना की परिचालन क्षमताओं के विकास में उपयोगी हो सकते हैं।




