क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने और आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी तथा संगठित अपराध जैसी सीमा पार चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिम्सटेक (BIMSTEC) के गृह मंत्रियों की बैठक के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करते हुए क्षेत्रीय देशों से मिलकर काम करने की आवश्यकता बताई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा संबंधी सहयोग को मजबूत करना और आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी तथा साइबर अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति विकसित करना है।
बिम्सटेक का पूरा नाम बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्रीय संगठन में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। यह संगठन दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देता है। बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के बीच व्यापारिक और समुद्री संपर्क के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा का महत्व भी बढ़ जाता है। आतंकवादी संगठनों, नशीले पदार्थों के तस्करों और संगठित आपराधिक गिरोहों की गतिविधियां कई बार एक से अधिक देशों तक फैल जाती हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और समय पर खुफिया जानकारी साझा करना आवश्यक हो जाता है।
अमित शाह ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के सख्त रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों को सामूहिक जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। आतंकवाद से निपटने के लिए केवल हमलों के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आतंकवादी संगठनों के पूरे नेटवर्क को कमजोर करना भी जरूरी है। इसमें आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने, उनकी भर्ती, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और अन्य देशों के खिलाफ गतिविधियां संचालित करने में मदद करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई शामिल है। भारत का जोर इस बात पर है कि बिम्सटेक क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने या उन्हें संचालित करने के लिए नहीं होना चाहिए।
गृह मंत्री ने आतंकवादी संगठनों की फंडिंग रोकने और उनके सहयोगियों की पहचान करने के लिए सदस्य देशों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आतंकवाद के पीछे काम करने वाले वित्तीय नेटवर्क, अवैध लेनदेन और संगठित अपराध से जुड़े संपर्कों की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि संबंधित देशों की एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में समय पर जानकारी मिलती है, तो वे अपने-अपने कानूनों के तहत जांच और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। इसी तरह, कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण की प्रक्रियाओं में सहयोग से उन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है, जो किसी दूसरे देश में जाकर कानून से बचने का प्रयास करते हैं।
बैठक में नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। भारत के लिए नशे का अवैध कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह युवाओं के स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और संगठित अपराध से भी जुड़ा हुआ है। नशीले पदार्थों की तस्करी से होने वाली अवैध कमाई आपराधिक नेटवर्क को मजबूत कर सकती है। कुछ मामलों में ऐसे नेटवर्क का संबंध आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण से भी हो सकता है। इस कारण भारत नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को व्यापक आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है।
नशे के कारोबार पर नियंत्रण के लिए भारत की रणनीति तस्करी के रास्तों की पहचान करने, अवैध आपूर्ति शृंखला को बाधित करने और इस कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच करने पर केंद्रित है। इसके साथ ही नशीले पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पूर्ववर्ती रसायनों की अवैध आपूर्ति पर निगरानी रखना भी महत्वपूर्ण है। इन रसायनों का इस्तेमाल कुछ प्रतिबंधित पदार्थों के निर्माण में किया जा सकता है। इसलिए संबंधित एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि इनका उपयोग वैध औद्योगिक गतिविधियों में हो रहा है या अवैध कारोबार के लिए इनकी आपूर्ति की जा रही है।
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध की जांच को अधिक जटिल बना दिया है। तस्कर ड्रोन, समुद्री मार्गों, पार्सल सेवाओं और इंटरनेट आधारित माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं। डार्क वेब और डिजिटल भुगतान के जरिए होने वाले कुछ लेनदेन की जांच करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में भारत के लिए सीमा प्रबंधन, समुद्री निगरानी, वित्तीय जांच और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। बिम्सटेक देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से सीमा पार तस्करी के तरीकों और संदिग्ध नेटवर्क के बारे में जानकारी साझा करने में मदद मिल सकती है।
नशीले पदार्थों के खिलाफ भारत की घरेलू नीति में कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, जागरूकता और पुनर्वास को भी महत्व दिया गया है। सरकार की रणनीति का उद्देश्य केवल तस्करों को पकड़ना या नशीले पदार्थों की खेप जब्त करना नहीं है, बल्कि नशे की मांग कम करना और इससे प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराना भी है। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए चिकित्सा सहायता, परामर्श और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ ही युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और समुदाय स्तर पर रोकथाम के प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।
केंद्र सरकार ने नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित केंद्रीय एजेंसियों, राज्य सरकारों और पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया है। नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी एनसीओआरडी जैसे तंत्र का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित करना और नशे से संबंधित मामलों में सूचनाओं तथा कार्रवाई का समन्वय करना है। इस व्यवस्था के माध्यम से तस्करी के नेटवर्क की पहचान, अवैध वित्तीय गतिविधियों की जांच और संबंधित मामलों में कार्रवाई को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है। नशे की समस्या से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन के साथ जन-जागरूकता और पुनर्वास को जोड़ना भी इस दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बिम्सटेक बैठक में आतंकवाद के अलावा अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, मानव तस्करी, कट्टरपंथ और साइबर अपराध जैसी चुनौतियों पर भी क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की गई। आधुनिक संचार तकनीक और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के विस्तार ने अपराधियों के लिए विभिन्न देशों में बैठे लोगों और संगठनों से संपर्क स्थापित करना आसान बनाया है। मानव तस्करी और साइबर अपराध जैसे मामलों में जांच कई बार अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। ऐसे में संबंधित एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करना, पीड़ितों की पहचान करना और कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत के लिए बिम्सटेक का महत्व केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। यह संगठन क्षेत्रीय संपर्क, समुद्री सुरक्षा और साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करता है। भारत और अन्य सदस्य देशों के बीच बेहतर सुरक्षा सहयोग से सीमा पार अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, इस दिशा में वास्तविक सफलता सदस्य देशों के बीच नियमित संवाद, विश्वसनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान, कानूनी सहयोग और सहमत निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक में आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अमित शाह का संदेश क्षेत्रीय सुरक्षा को साझा जिम्मेदारी के रूप में देखने और सीमा पार आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने से जुड़ा है। भारत की रणनीति में आतंकवादी फंडिंग पर रोक, तस्करी के नेटवर्क की पहचान, अवैध वित्तीय गतिविधियों की जांच, नशे के खिलाफ जागरूकता और प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे पहलू शामिल हैं। आने वाले समय में बिम्सटेक देशों के बीच सहयोग किस हद तक व्यावहारिक कार्रवाई में बदलता है, यह क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने के प्रयासों की सफलता तय करने में महत्वपूर्ण होगा।




