ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच में भागीदारी से बांग्लादेश को आर्थिक, सामाजिक और कूटनीतिक स्तर पर कई अवसर मिल सकते थे। हसीना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मौजूदगी केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि इससे देशों को व्यापार, निवेश और विकास से जुड़े मुद्दों पर दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलता है।
शेख हसीना ने अपने बयान में बांग्लादेश की विदेश नीति को लेकर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी देश के महत्वपूर्ण कूटनीतिक फैसले लेते समय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक मतभेदों और तात्कालिक परिस्थितियों के कारण ऐसे अवसरों से दूरी बनाना उचित नहीं है, जिनसे देश को भविष्य में लाभ मिल सकता है। हसीना का तर्क है कि बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मंचों का इस्तेमाल अपने आर्थिक विकास और वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए करना चाहिए।
भारत की राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक सहयोग, विकासशील देशों की भूमिका, व्यापार, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां सदस्य देशों के साथ-साथ आमंत्रित देशों को भी सहयोग की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर मिलता है। बांग्लादेश ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य नहीं है, लेकिन उसे सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। इसके बावजूद बांग्लादेश की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ।
शेख हसीना का मानना है कि सम्मेलन में भाग लेने से बांग्लादेश को विभिन्न देशों के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने का अवसर मिल सकता था। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में कपड़ा उद्योग, निर्यात, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में ब्रिक्स जैसे मंच पर मौजूदगी से निवेश आकर्षित करने, व्यापारिक संबंध मजबूत करने और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाई जा सकती थी। इसके अलावा, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, परिवहन और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हो सकती थी। हालांकि, किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने मात्र से आर्थिक लाभ सुनिश्चित नहीं होते। वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि बातचीत के बाद किस तरह के समझौते और व्यावहारिक कदम उठाए जाते हैं।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने के पीछे भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा कूटनीतिक परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की ओर से उन्हें बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। हालांकि, बांग्लादेश की ओर से यह रुख सामने आया कि प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा किसी बहुपक्षीय सम्मेलन में भाग लेने के बजाय औपचारिक द्विपक्षीय दौरे के रूप में होनी चाहिए। दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और आपसी सम्मान से जुड़े मुद्दे भी इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में रहे हैं।
भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, परिवहन संपर्क, ऊर्जा सहयोग, सीमा प्रबंधन और नदी जल बंटवारे जैसे कई विषय सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच नियमित संवाद और उच्चस्तरीय बातचीत को महत्वपूर्ण माना जाता है। ब्रिक्स सम्मेलन में भागीदारी से दोनों देशों के प्रतिनिधियों को संवाद का अवसर मिल सकता था, हालांकि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय विवादों को सुलझाना नहीं था। इन मुद्दों के समाधान के लिए दोनों सरकारों के बीच अलग से बातचीत और सहमति जरूरी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण शेख हसीना की भारत में मौजूदगी भी रहा है। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था। इसके बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। तब से बांग्लादेश की ओर से उनकी वापसी और प्रत्यर्पण से जुड़े मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। इस मामले ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया है। हालांकि, भारत-बांग्लादेश संबंध केवल इस एक मुद्दे तक सीमित नहीं हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
शेख हसीना ने भारत के साथ संबंधों को बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए व्यापक विदेश नीति की जरूरत पर जोर दिया। उनका मानना है कि किसी एक देश के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने का मतलब दूसरे देशों से दूरी बनाना नहीं है। बांग्लादेश भारत के साथ सहयोग जारी रखते हुए चीन, जापान, अमेरिका, यूरोपीय देशों और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भी आर्थिक तथा कूटनीतिक संबंध मजबूत कर सकता है। उनके अनुसार, सभी देशों के साथ संवाद बनाए रखना और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप साझेदारी विकसित करना किसी भी देश की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश की अनुपस्थिति ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि राजनीतिक मतभेदों के बीच आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है। बांग्लादेश के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध बनाए रखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देश व्यापार मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति, परिवहन नेटवर्क और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वहीं, भारत के लिए भी बांग्लादेश के साथ स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध क्षेत्रीय संपर्क तथा दक्षिण एशिया में आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल, ब्रिक्स सम्मेलन से बांग्लादेश की दूरी और इस पर शेख हसीना की टिप्पणी ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। जहां पूर्व प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में भागीदारी को बांग्लादेश के लिए संभावित आर्थिक और सामाजिक लाभ का अवसर बताया है, वहीं बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ उच्चस्तरीय संपर्क के लिए अनुकूल माहौल और आपसी सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक बातचीत यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।




