उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली के इंडिया गेट के पास प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि क्या अपनी बेटी के लिए न्याय मांगना भी अपराध है? इस घटना ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका, जांच की पारदर्शिता और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी की हत्या से जुड़े कथित वीआईपी पहलू की निष्पक्ष जांच और भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। परिवार की मांग है कि जब तक मामले से जुड़े सभी सवालों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर परिवार ने दिल्ली के इंडिया गेट के पास प्रदर्शन किया। गुरुवार तड़के पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से अंकिता के माता-पिता और कांग्रेस के कुछ नेताओं को हिरासत में ले लिया। बाद में अंकिता के माता-पिता को रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे परिवार के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस का कहना है कि पीड़ित परिवार को अपनी शिकायतें रखने और न्याय की मांग करने का पूरा अधिकार है। पार्टी नेताओं ने इस मामले को महिलाओं की सुरक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय व्यवस्था में जनता के भरोसे से जोड़ते हुए सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि परिवार की चिंताओं का समाधान करने के बजाय प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, हिरासत में लिए जाने की घटना और उससे जुड़े राजनीतिक आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति की कथित संलिप्तता या पुलिस की कार्रवाई के औचित्य का निर्धारण उपलब्ध तथ्यों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
अंकिता भंडारी के परिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का भी समर्थन मिला है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने 14 अक्टूबर को इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने परिवार की न्याय की मांग के प्रति समर्थन जताया। कांग्रेस ने इस दौरान कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। पार्टी का कहना है कि मामले में उठ रहे सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए और यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अंकिता भंडारी हत्याकांड सितंबर 2022 में सामने आया था। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता ऋषिकेश के पास स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। घटना के चार दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। मामले की जांच के दौरान रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को आरोपी बनाया गया। अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, दोषियों को सजा मिलने के बावजूद अंकिता का परिवार मामले के कुछ पहलुओं को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है।
इस हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। अंकिता के माता-पिता चाहते हैं कि इस पहलू की निष्पक्ष जांच हो और मामले से जुड़े सभी सवालों का जवाब दिया जाए। परिवार की मांग है कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका के संबंध में ठोस सबूत सामने आते हैं, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। परिवार ने दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई है। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों को किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
अंकिता के माता-पिता का विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है, जब दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर परिवार ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। परिजनों का कहना है कि कथित वीआईपी पहलू से जुड़े सवालों का समाधान होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। परिवार चाहता है कि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और मामले की जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि पीड़ित परिवार की चिंताओं को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय तथ्यों और कानून के आधार पर उनका समाधान किया जाना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत से रिहा होने के बाद अंकिता के माता-पिता ने अपनी मांगों पर कायम रहने का संकेत दिया। परिवार ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग दोहराई। अंकिता की मां ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भूख हड़ताल करने की बात भी कही। परिवार का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल एक नियुक्ति के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपनी बेटी की हत्या से जुड़े सभी अनुत्तरित सवालों का जवाब चाहते हैं। वे चाहते हैं कि कथित वीआईपी पहलू की जांच की जाए और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाए जाने के बावजूद परिवार की ओर से उठाए जा रहे सवालों ने एक बार फिर मामले को चर्चा में ला दिया है। इंडिया गेट पर प्रदर्शन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की परिवार से मुलाकात तथा अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की घटना ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार और संबंधित प्रशासन परिवार की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और कथित वीआईपी पहलू से जुड़े सवालों पर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण बनी हुई है। अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के लिए न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने इस मांग का समर्थन करते हुए सरकार से जवाब देने की अपील की है।




