विजयादशमी पर देश को शुभकामनाएं, विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें नागरिक

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देशभर में विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व धार्मिक आस्था, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेशों में शीर्ष नेताओं ने सत्य, धर्म, न्याय, नैतिकता और सामाजिक सद्भाव के महत्व को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने नागरिकों से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के श्रेष्ठ आदर्शों को अपनाने और समावेशी समाज के साथ विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि विजयादशमी भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, सदाचार, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देता है। यह पर्व याद दिलाता है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए अन्याय तथा अधर्म पर विजय प्राप्त की जा सकती है। राष्ट्रपति ने लोगों से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं में निहित श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और आपसी सम्मान को मजबूत करके एक समावेशी तथा विकसित भारत का निर्माण किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने सभी देशवासियों के सुख, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि विजय का यह पावन पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, खुशियां, समृद्धि और सफलता लेकर आए। प्रधानमंत्री के संदेश में त्योहार के सकारात्मक और प्रेरणादायक पहलू पर जोर दिया गया। विजयादशमी लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने, अपने संकल्प को मजबूत बनाए रखने और सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यह अवसर नागरिकों को अपने व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समाज और देश के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का भी संदेश देता है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी विजयादशमी के अवसर पर देश और विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस पर्व को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता में एकता की भावना का प्रतीक बताया। विजयादशमी सत्य, धर्म और न्याय में विश्वास को मजबूत करती है तथा बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। उपराष्ट्रपति ने सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनका संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि देश की प्रगति के लिए नागरिकों के बीच एकता और परस्पर सम्मान बेहद जरूरी हैं।

विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे दशहरा भी कहा जाता है और यह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। रामायण की मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था। इस घटना को अन्याय, अहंकार और अधर्म के अंत के रूप में देखा जाता है। इसी परंपरा के तहत देश के अनेक हिस्सों में दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। वहीं, विजयादशमी का संबंध देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जुड़ा है। यह मान्यता शक्ति, साहस और धर्म की स्थापना का संदेश देती है।

देशभर में विजयादशमी के अवसर पर मंदिरों में पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान, रामलीला के समापन कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। कई शहरों और कस्बों में दशहरा मेले लगते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ पहुंचते हैं। शाम के समय आयोजित होने वाले रावण दहन कार्यक्रम त्योहार के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होते हैं। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार इस पर्व को मनाने के तरीके भी अलग-अलग हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोग अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ते हैं तथा नई पीढ़ी तक परंपराओं और नैतिक मूल्यों का संदेश पहुंचाते हैं।

विजयादशमी का महत्व केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संदेश आज के सामाजिक जीवन में भी प्रासंगिक है। यह पर्व लोगों को सिखाता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सत्यनिष्ठा, न्याय, अनुशासन और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है। समाज में फैली बुराइयों, भेदभाव और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा भी इस त्योहार से मिलती है। भगवान श्रीराम और देवी दुर्गा से जुड़ी विजय की कथाएं यह संदेश देती हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ सही रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।

राष्ट्रपति के संदेश में समावेशी समाज और विकसित भारत के निर्माण पर दिया गया जोर देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की भूमिका को रेखांकित करता है। वहीं, प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं लोगों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करने का संदेश देती हैं। उपराष्ट्रपति ने भी एकता और भाईचारे को भारत की सांस्कृतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। इन संदेशों का व्यापक भाव यही है कि देश का विकास तभी सार्थक होगा, जब आर्थिक प्रगति के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और सभी वर्गों की भागीदारी को भी महत्व दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, विजयादशमी केवल पौराणिक विजय का उत्सव नहीं, बल्कि अपने जीवन में अच्छाई, नैतिकता और न्याय को अपनाने का अवसर भी है। यह पर्व हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने, समाज में सद्भाव बनाए रखने और देश की प्रगति में योगदान देने की प्रेरणा देता है। इस विजयादशमी पर सत्य और धर्म के आदर्शों को अपनाकर एक शांतिपूर्ण, समृद्ध, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लेना ही इस पर्व के संदेश को सार्थक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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