भारत का रक्षा कूटनीति पर फोकस, राजनाथ सिंह ने क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई

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सेबू, फिलीपींस। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने तथा रक्षा सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। फिलीपींस में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के दौरान भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और समावेशी व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना तथा सदस्य देशों के बीच रक्षा साझेदारी को व्यापक बनाना है।

राजनाथ सिंह की फिलीपींस यात्रा को भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत का मानना है कि केवल सैन्य क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि देशों के बीच नियमित संवाद, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन भी आवश्यक है। आपसी विश्वास और सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने तथा संभावित तनाव को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।

ADMM-Plus दक्षिण-पूर्व एशिया में रक्षा और सुरक्षा सहयोग का एक प्रमुख बहुपक्षीय मंच है। इसमें आसियान के सदस्य देशों के साथ भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे संवाद साझेदार शामिल हैं। इस मंच के माध्यम से रक्षा मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं और आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपाय तलाशते हैं। भारत की भागीदारी उसकी एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण सुनिश्चित करना विभिन्न देशों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल है। समुद्री डकैती, मानव तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना आवश्यक है। भारत इन क्षेत्रों में आसियान देशों के साथ सहयोग मजबूत करने का समर्थन करता रहा है।

भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा संबंध भी लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो सी. टियोडोरो जूनियर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा आधुनिकीकरण और संयुक्त रक्षा उत्पादन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण, रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन प्रयासों से क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की दोनों देशों की क्षमता मजबूत हो सकती है।

भारत-फिलीपींस रक्षा साझेदारी का एक प्रमुख उदाहरण ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली है। फिलीपींस ने अपनी सैन्य आधुनिकीकरण योजना के तहत भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस मिसाइल प्रणाली की खरीद की है। यह सहयोग भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र की बढ़ती भूमिका और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रक्षा संबंधों को विस्तार देने के प्रयासों को दर्शाता है। भविष्य में संयुक्त उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों के रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

फिलीपींस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह ने अन्य प्रमुख साझेदार देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ भी बातचीत की। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य तैयारियों, प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा रक्षा उद्योग में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वहीं, जापान के साथ समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक सहयोग और रक्षा प्रौद्योगिकी से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहे। इन बैठकों का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना और विभिन्न देशों के बीच रक्षा सहयोग को अधिक प्रभावी बनाना है।

भारत की एक्ट ईस्ट नीति दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है। भारत ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्था को महत्वपूर्ण मानता है, जिसमें सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाए, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन हो और विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाए।

रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भारत विभिन्न देशों के साथ रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, संयुक्त उत्पादन, तकनीकी विकास और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के अवसर तलाश रहा है। इससे सहयोगी देशों की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ भारत के रक्षा उद्योग को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिल सकता है। समुद्री निगरानी, आतंकवाद से मुकाबले और रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग इस व्यापक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

कुल मिलाकर, फिलीपींस में ADMM-Plus बैठक भारत के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने और साझा सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। राजनाथ सिंह का संदेश आपसी विश्वास, संवाद, संप्रभुता के सम्मान और व्यावहारिक रक्षा साझेदारी पर केंद्रित है। भारत की कोशिश है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए विभिन्न देश मिलकर काम करें और सुरक्षा सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय शांति तथा विकास को बढ़ावा दें।

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