बनासकांठा में मोदी का बड़ा संदेश, खेती से लेकर डेयरी तक 14 हजार करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के बनासकांठा दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए आलू से सोना बनाने वाले पुराने राजनीतिक बयान का जिक्र किया। उन्होंने फ्रेंच फ्राइज बनाने वाले आलू प्रसंस्करण संयंत्र का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बनासकांठा में किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री का गुजरात दौरा दो दिनों का है। इस दौरान कृषि, डेयरी, पशुपालन, परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं कार्यक्रम में शामिल हैं।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने आलू से सोना बनाने वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि बनासकांठा के किसान आलू की खेती और उससे जुड़े कारोबार की वास्तविकता अच्छी तरह जानते हैं। यहां आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है और किसान आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने फ्रेंच फ्राइज बनाने वाले संयंत्र को इसी बदलाव का उदाहरण बताया।

दरअसल, आलू से सोना बनाने वाला बयान वर्ष 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान चर्चा में आया था। उस समय कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पाटन की एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए किसानों से जुड़े एक कथित चुनावी वादे का उल्लेख किया था। राहुल गांधी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा था कि ऐसी मशीन लगाई जाएगी, जिसमें एक तरफ आलू डालने पर दूसरी तरफ सोना निकलेगा। इसके बाद यह बयान लंबे समय तक भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस का विषय बना रहा। अब बनासकांठा में आलू प्रसंस्करण संयंत्र के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने इसी पुराने विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया।

प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे का एक प्रमुख आकर्षण बनासकांठा के सानादर में स्थापित आलू प्रसंस्करण संयंत्र रहा। बनास डेयरी की ओर से विकसित इस संयंत्र का उद्देश्य आलू को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उससे फ्रेंच फ्राइज जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करना है। इस प्लांट की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर दो टन से पांच टन प्रति घंटे किया गया है। परियोजना पर लगभग 51.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें आलू की खेती से लेकर अंतिम उत्पाद तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत किया गया है। इसके तहत प्रयोगशाला में पौध तैयार करने, खेतों में बीज उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज में आलू सुरक्षित रखने और फैक्ट्री में प्रसंस्करण करने की व्यवस्था विकसित की गई है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने बनासकांठा के भिलड़ी में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर का भी उद्घाटन किया। लगभग 127 एकड़ में फैला यह केंद्र करीब 324.77 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य देश में पशुओं की नस्ल सुधारने, बेहतर प्रजनन तकनीक विकसित करने और दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ाने को प्रोत्साहित करना है। इस केंद्र में आधुनिक प्रजनन तकनीकों और भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाएगा। खासतौर पर गुजरात की प्रसिद्ध कांकरेज नस्ल के संरक्षण और विकास पर ध्यान दिया जाएगा। इस पहल से पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराने और डेयरी कारोबार को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डेयरी कारोबार को आधुनिक बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने बनास डेयरी के पलानपुर स्थित परिसर में अल्ट्रा हाई टेम्परेचर उत्पादों के लिए ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम का भी उद्घाटन किया। इस परियोजना पर लगभग 31.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह एक आधुनिक स्वचालित भंडारण प्रणाली है, जिसके माध्यम से डेयरी उत्पादों को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार निकालने की सुविधा मिलेगी। इस प्रणाली में नौ स्तरों वाले स्टील रैक बनाए गए हैं और इसमें लगभग 11 हजार पैलेट की भंडारण क्षमता है। स्वचालित तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादों की आवाजाही, भंडारण और प्रबंधन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने बनास डेयरी की ओर से थराद और राधनपुर में स्थापित किए जाने वाले दो नए बायो-CNG संयंत्रों की आधारशिला भी रखी। इन संयंत्रों में प्रतिदिन क्रमशः 75 मीट्रिक टन और 100 मीट्रिक टन गोबर का प्रसंस्करण किया जा सकेगा। गोबर से बायो-CNG और जैविक खाद तैयार करने की इस पहल का उद्देश्य पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है। इससे पशुपालन को केवल दूध उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने में मदद मिलेगी।

गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त भी जारी करने का कार्यक्रम रखा गया। इसके तहत देशभर के पात्र किसानों के खातों में लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता जारी की जानी है। यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष के तहत पूरी हुई 521 परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं। इन परियोजनाओं में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, साइलो, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। इन पर लगभग 4,950 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत आई है।

प्रधानमंत्री के दौरे में परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। अहमदाबाद मेट्रो के फेज-2A और फेज-2B का शिलान्यास किया जाना है। फेज-2A के तहत कोटेश्वर रोड से एयरपोर्ट तक पांच स्टेशन बनाए जाएंगे, जबकि फेज-2B में GIFT सिटी से शाहपुर तक तीन स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही अहमदाबाद-मेहसाणा स्टेट हाईवे-41 को चार लेन से बढ़ाकर आठ लेन करने की परियोजना का भी शिलान्यास किया जाना है। इस परियोजना पर करीब 2,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन योजनाओं से उत्तर गुजरात और अहमदाबाद के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद-साबरमती-वाराणसी एक्सप्रेस और मेहसाणा-बेचाराजी-साबरमती मेमू ट्रेन सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे का दूसरा दिन भी महत्वपूर्ण रहने वाला है। 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री इस अवसर पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा वह भारत पर्व 2026 का उद्घाटन करेंगे और एकता प्रकाश पर्व तथा नर्मदा आरती में भी शामिल होंगे। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सुरक्षा बलों की परेड और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बनासकांठा दौरा राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ उन्होंने राहुल गांधी पर पुराने आलू वाले बयान को लेकर कटाक्ष किया, वहीं दूसरी तरफ आलू प्रसंस्करण, पशु नस्ल सुधार, डेयरी भंडारण और बायो-CNG जैसी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक कितना पहुंचता है, यह इनके प्रभावी संचालन और बाजार व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

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