प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2 जुलाई से शुरू हुआ 8‑दिन का पाँच‑राष्ट्र दौरा एक बेहद अहम और रणनीतिक मिशन के तौर पर देखा जा रहा है। 9 जुलाई तक चलने वाले इस दौरे में पीएम मोदी जिन देशों का दौरा करेंगे, वे न केवल भारत की विदेश नीति में प्राथमिकता रखते हैं, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ तक भारत की पहुँच और प्रभाव को और मज़बूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब दुनिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और विकासशील देशों के समूह — यानी ग्लोबल साउथ — को एकजुट कर भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाना चाहता है। पीएम मोदी की यह यात्रा व्यापार, तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक मंचों पर समन्वय जैसे कई स्तरों पर नए अवसर खोलने की दिशा में मानी जा रही है।
दौरे के दौरान बहुपक्षीय बैठकें, द्विपक्षीय वार्ताएं और निवेश समझौतों की संभावनाएं हैं। साथ ही, यह भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करने का भी अवसर है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’, ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘ग्लोबल साउथ लीडरशिप’ जैसी नीतियों को धरातल पर उतारने का बड़ा कदम है।




