सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अपराध की क्रूरता ही मृत्युदंड के लिए पर्याप्त नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि केवल अपराध की क्रूरता ही किसी दोषी को मृत्युदंड देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। यह टिप्पणी कोर्ट ने उत्तराखंड के बहुचर्चित देहरादून दुष्कर्म व हत्या मामले की सुनवाई के दौरान की।

इस केस में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई थी, जिसके लिए निचली अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने सजा पर पुनर्विचार करते हुए कहा कि हर जघन्य अपराध “दुर्लभ से दुर्लभतम” की श्रेणी में नहीं आता।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि दोषी को सुधरने का मौका मिलना चाहिए और न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल प्रतिशोध नहीं, बल्कि पुनर्वास भी है।

इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। यह फैसला भारतीय दंड व्यवस्था में पुनर्विचार और संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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