सूडान में जारी राजनीतिक और सैन्य संकट अब और भी गंभीर होता जा रहा है। देश पहले से ही गृहयुद्ध की चपेट में है, और अब सूडानी अर्धसैनिक बल RSF (Rapid Support Forces) ने सूबे दारफुर में एक समानांतर सरकार का गठन कर हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, RSF ने दारफुर क्षेत्र में अपनी ‘प्रशासनिक संरचना’ स्थापित करते हुए खुद को वहां की वैध सत्ता घोषित कर दिया है। यह कदम सूडान की सत्तारूढ़ सेना (SAF – Sudanese Armed Forces) के खिलाफ खुली चुनौती माना जा रहा है।
क्या है RSF और SAF के बीच संघर्ष?
सूडान में अप्रैल 2023 से RSF और SAF के बीच खूनी संघर्ष चल रहा है। दोनों सेनाएं सत्ता पर नियंत्रण के लिए लड़ रही हैं। RSF का नेतृत्व मोहम्मद हमदान दगालो (हेमेदती) कर रहे हैं जबकि SAF की कमान जनरल अब्देल फत्ताह अल-बुरहान के हाथों में है।
दारफुर में हिंसा और मानव संकट
दारफुर पहले ही एक हिंसाग्रस्त इलाका रहा है। अब RSF द्वारा समानांतर सरकार बनाने के बाद वहां हालात और खराब हो गए हैं।
हजारों लोग मारे जा चुके हैं,
लाखों लोग बेघर हुए हैं,
भोजन, दवा और राहत सामग्री की भारी कमी देखी जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात यूं ही बिगड़ते रहे, तो यह संकट अफ्रीका के सबसे बड़े मानवीय संकटों में बदल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, अफ्रीकी संघ और यूरोपीय संघ ने RSF के इस कदम की निंदा की है और सूडान की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने की अपील की है।
हालांकि, अभी तक कोई प्रभावी मध्यस्थता सफल नहीं हो पाई है।
भारत का नजरिया
भारत सरकार भी सूडान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए समय-समय पर ऑपरेशन चला चुकी है। भारत ने सूडान में स्थिरता और लोकतंत्र की बहाली की वकालत की है।
निष्कर्ष:
सूडान में बढ़ता गृहयुद्ध न केवल देश के लिए बल्कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए चिंता का विषय बन चुका है। RSF द्वारा समानांतर सरकार बनाने का कदम युद्ध को और जटिल बना सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।




