नई दिल्ली, 30 जुलाई 2025
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को एक बार फिर “दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था” बताया है। IMF की नवीनतम रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह पहले अनुमानित 6.2 प्रतिशत से अधिक है और देश की आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है।
भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार बनी रहेगी
IMF की World Economic Outlook रिपोर्ट के जुलाई संस्करण में बताया गया है कि भारत की विकास दर आने वाले वर्षों में स्थिर रहेगी। खास बात यह है कि 2026-27 में भी यह दर 6.4% रहने की उम्मीद है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारत का आर्थिक आधार अब अधिक मजबूत होता जा रहा है।
IMF के अनुसार, भारत की वृद्धि को घरेलू मांग, उद्योगों में निवेश, और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सरकारी खर्च द्वारा ऊर्जा मिल रही है।
वैश्विक मंच पर भारत का प्रदर्शन
IMF ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि भारत अब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत भूमिका निभा रहा है। जहां अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन जैसे देश कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था संतुलित और लचीली बनी हुई है।
IMF ने 2025 के लिए भारत की GDP वृद्धि को 6.7% (कैलेंडर वर्ष के अनुसार) और 2026 के लिए 6.4% अनुमानित किया है।
वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण
IMF के अनुसार भारत की विकास दर बढ़ने के पीछे कई मजबूत कारण हैं:
मजबूत घरेलू खपत: लोग अधिक खर्च कर रहे हैं और बाजार में मांग बनी हुई है।
सरकारी निवेश: सड़कों, रेलवे, और डिजिटल इंडिया जैसे मिशनों पर बड़े स्तर पर पूंजी निवेश हुआ है |
नीतिगत सुधार: जैसे कि GST सुधार, PLI स्कीम और स्टार्टअप सेक्टर में बढ़ावा।
IMF के सुझाव
IMF ने भारत सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं ताकि दीर्घकालिक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके:
रोज़गार सृजन पर अधिक फोकस करें।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाएं।
भूमि और श्रम सुधार तेज़ी से लागू करें।
व्यवसाय करने की प्रक्रिया को और आसान बनाएं।
इन सुझावों के ज़रिए भारत न केवल विकास दर को बरकरार रख सकता है, बल्कि सामाजिक समावेशन भी सुनिश्चित कर सकता है।
आरबीआई और IMF के अनुमान में अंतर
जहां भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 6.5% की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है, वहीं IMF ने इसे 6.4% पर रखा है। हालांकि यह अंतर बहुत छोटा है, लेकिन यह संकेत देता है कि वैश्विक संस्थाएं भी भारत की आर्थिक स्थिरता को लेकर सकारात्मक हैं।
चीन और अन्य देशों से तुलना
रिपोर्ट के अनुसार:
चीन की वृद्धि 2025 में 4.8% और 2026 में 4.2% अनुमानित है।
वैश्विक औसत वृद्धि दर 2025 में 3.0% और 2026 में 3.1% रहने की संभावना है।
इससे स्पष्ट है कि भारत इन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से कहीं तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
क्या हैं संभावित खतरे?
IMF ने यह भी आगाह किया है कि वैश्विक व्यापार में जारी अनिश्चितता, वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों से भारत जैसे देशों को सावधान रहना होगा। यदि तेल की कीमतों में तेजी या वैश्विक मंदी जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, तो उनका प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
IMF की इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भारत की अर्थव्यवस्था सही दिशा में बढ़ रही है। मजबूत नीतियों, घरेलू मांग, और निवेश के चलते भारत आने वाले वर्षों में भी विकास का नेतृत्व करता रहेगा। लेकिन इस रफ्तार को बरकरार रखने के लिए सरकार को श्रम, भूमि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक फैसले लेने होंगे।
इस तरह की स्थिर और संतुलित वृद्धि भारत को न केवल वैश्विक मंच पर आगे ले जाएगी, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवनस्तर को भी ऊपर उठाने में मदद करेगी।




