नई दिल्ली, 4 अगस्त 2025 —
संसद के मानसून सत्र में आज एक अहम मोड़ आने की संभावना है, क्योंकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय खेल विधेयक को लोकसभा में पेश करने जा रही है। इस विधेयक का उद्देश्य देश में खेल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना, खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा करना और खेल संघों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
वहीं, संसद परिसर के बाहर और भीतर एसआईआर (स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर रिव्यू) और एसएससी (स्पोर्ट्स सेलेक्शन काउंसिल) से जुड़े विवादों को लेकर विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध की तैयारी कर ली है। इसके चलते सदन में हंगामे के आसार हैं।
विधेयक के प्रमुख बिंदु:
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राष्ट्रीय खेल महासंघों को RTI के तहत लाने का प्रस्ताव
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खिलाड़ियों के लिए स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र
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चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्ध सुनवाई
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खेल मंत्रालय को निगरानी की अतिरिक्त शक्तियाँ
जहां सरकार इस विधेयक को “खेलों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम” बता रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि “एसआईआर और एसएससी से जुड़े आरोपों की अनदेखी कर केवल दिखावटी बदलाव लाए जा रहे हैं।”
विशेषज्ञों के अनुसार यदि विधेयक को सही रूप में लागू किया गया, तो यह भारतीय खेल जगत में एक नई व्यवस्था की शुरुआत कर सकता है। लेकिन विपक्षी विरोध और संशोधनों की मांग इसे टकराव का मुद्दा बना सकते हैं।




