नई दिल्ली/मॉस्को – भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल इन दिनों रूस के दौरे पर हैं और उनकी मीटिंग्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लेकर डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और टॉप सिक्योरिटी अफसरों तक, डोभाल की बैठकें यह साफ संकेत देती हैं कि भारत जियोपॉलिटिक्स के केंद्र में अपनी भूमिका और मज़बूत करना चाहता है।
पुतिन से मीटिंग: क्या था एजेंडा?
डोभाल और पुतिन की यह मुलाकात अचानक नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच भारत-रूस रक्षा सहयोग, यूक्रेन युद्ध, और तेजी से बदलते वैश्विक पावर डायनामिक्स पर बातचीत हुई। यह बैठक इस बात की पुष्टि करती है कि भारत रूस के साथ अपने स्ट्रैटजिक रिलेशंसको लेकर गंभीर है — खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका और पश्चिमी देश रूस को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं।
क्यों अहम हैं डिप्टी पीएम से हुई बातचीत?
डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और रूसी रक्षा अधिकारियों से डोभाल की मुलाकातें भारत की सुरक्षा नीति और डिफेंस डिप्लोमेसी की झलक देती हैं। इस बातचीत में खासतौर पर हाई-एंड डिफेंस टेक्नोलॉजी, इंडो-रशियन प्रोजेक्ट्स, और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
ट्रंप के लिए क्या है यह संकेत?
अमेरिका में चुनावी माहौल गर्म है और डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं। ऐसे में भारत की रूस के साथ गहराती दोस्ती अमेरिका को एक साफ संकेत देती है:
“भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है और किसी के दबाव में नहीं आने वाला।”
यह खासकर ट्रंप के लिए एक मैसेज हो सकता है कि यदि वो सत्ता में लौटते हैं, तो भारत को लेकर पुनः सोचने की जरूरत होगी — एक ऐसा राष्ट्र जो अपने हितों को सर्वोपरि रखता है।
भारत का बढ़ता ग्लोबल दबदबा
डोभाल की इस यात्रा को केवल एक डिप्लोमैटिक विज़िट के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह यात्रा दर्शाती है कि भारत अब दुनिया की बड़ी शक्तियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है, और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी बात मजबूती से रख रहा है।




