सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को बड़ा झटका दिया है। मानहानि के एक मामले में उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है।
यह मामला 2006 में दर्ज की गई एक आपराधिक मानहानि की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें मेधा पाटकर पर कथित तौर पर झूठे और अपमानजनक बयान देने का आरोप लगाया गया था। इससे पहले निचली अदालत और हाई कोर्ट दोनों ने उन्हें दोषी ठहराया था। मेधा पाटकर ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी।
मुख्य बिंदु:
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सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया
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कोर्ट ने कहा कि “स्वतंत्र अभिव्यक्ति की सीमा होती है”
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पाटकर को पहले ही सजा के तौर पर साधारण कारावास और जुर्माना दिया जा चुका है
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याचिका खारिज होने के बाद अब उन्हें यह सजा भुगतनी होगी
मेधा पाटकर, जो ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की प्रमुख चेहरा रही हैं, लंबे समय से सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। लेकिन इस मामले में अदालत ने उनकी टिप्पणियों को कानून के दायरे से बाहर पाया।
क्या कहा कोर्ट ने:
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, “किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व को यह अधिकार नहीं कि वह दूसरों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले बयान दे। आलोचना की भी एक मर्यादा होती है।”




