उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 : सत्ता बनाम विपक्ष का बड़ा मुकाबला

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नई दिल्ली, 20 अगस्त

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का माहौल आज और गरमा गया। एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।

राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं और भाजपा संगठन व संसदीय राजनीति में गहरी पकड़ रखते हैं। वह दो बार सांसद रह चुके हैं और झारखंड, पुडुचेरी के अलावा महाराष्ट्र के राज्यपाल के तौर पर भी काम कर चुके हैं। दक्षिण भारत में बीजेपी के चेहरे के रूप में उनकी पहचान मजबूत है। खास बात यह है कि वह तमिलनाडु के ओबीसी वर्ग के गौंडर समुदाय से आते हैं, जिसे परंपरागत रूप से भाजपा और अन्नाद्रमुक का समर्थन मिलता रहा है। माना जा रहा है कि इस दांव के जरिए भाजपा दक्षिण में अपनी जड़ें और मज़बूत करना चाहती है।

दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक भी पीछे नहीं है। वह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतार रहा है। रेड्डी अपनी निष्पक्षता और संविधान व नागरिक अधिकारों से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। विपक्ष उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक बताकर चुनावी मैदान में उतार रहा है। उनका नामांकन कल दाखिल होगा।

संख्या बल के हिसाब से एनडीए का पलड़ा भारी है, लेकिन विपक्ष ने रणनीतिक गठजोड़ और एकजुटता के दम पर चुनाव को कड़ा बना दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आम तौर पर उपराष्ट्रपति चुनाव में सस्पेंस नहीं होता, मगर इस बार तस्वीर अलग है। छोटे दलों की भूमिका और विपक्ष की एकता ने इसे “रोमांचक जंग” का रूप दे दिया है।

उपराष्ट्रपति का पद सिर्फ एक संवैधानिक गरिमा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी भी निभाता है। यही कारण है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रहे हैं।

अब नज़रें इस चुनावी नतीजे पर टिकी हैं, जो तय करेगा न सिर्फ अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, बल्कि आने वाले वक्त में देश की राजनीति की दिशा भी क्या होगी।

रिपोर्ट : निखिल रस्तोगी

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