उत्तर प्रदेश में इस समय यूरिया खाद की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि राज्य के सीमावर्ती (बॉर्डर) जिलों में यूरिया की बोरियों की जमकर कालाबाजारी सामने आ रही है। किसानों को जरूरी खाद समय पर न मिलने से उनकी फसलें खतरे में पड़ गई हैं।
🔍 क्या है मामला?
सूत्रों के मुताबिक, नेपाल सीमा से सटे जिलों में यूरिया की भारी मात्रा में अवैध बिक्री और स्टॉकिंग की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय व्यापारी यूरिया की बोरियों को बड़ी मात्रा में छिपाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद बॉर्डर जिलों में डेरा डाल दिया है। छापेमारी और निरीक्षण का अभियान लगातार जारी है, ताकि कालाबाजारी पर लगाम लगाई जा सके।
कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया – “हम हालात पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
किसान बेहाल, बढ़ रही चिंता
यूरिया की कमी का सीधा असर धान और गन्ने जैसी फसलों पर पड़ रहा है। किसान दिनभर लाइन में खड़े होकर भी खाली हाथ लौट रहे हैं। इससे उनकी उत्पादन क्षमता और लागत दोनों पर असर पड़ रहा है।
समाधान की दिशा में कदम
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प्रशासन ने कंट्रोल रेट पर खाद उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
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निगरानी टीमों को सक्रिय कर दिया गया है।
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जरूरतमंद किसानों के लिए मोबाइल वैन से यूरिया वितरण की योजना पर काम हो रहा है।




