प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के भावनगर में आयोजित ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम में देश को आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने करीब ₹34,200 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को तकनीक और जहाज निर्माण जैसे अहम क्षेत्रों में अब विदेशी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, “चाहे वह सेमीकंडक्टर चिप हो या समुद्री जहाज (शिप) — हमें इसे भारत में ही बनाना होगा।”
आत्मनिर्भरता को बताया देश की मजबूती
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आज भारत का सबसे बड़ा दुश्मन कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता है। जब तक देश हर तकनीक और संसाधन के लिए बाहर की ओर देखेगा, तब तक वह कमजोर बना रहेगा। उन्होंने जनता से अपील की कि आत्मनिर्भर भारत केवल सरकार की योजना नहीं बल्कि हर नागरिक का संकल्प होना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक मजबूती ही नहीं देती बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मसम्मान और भविष्य की स्थिरता से भी जुड़ी है। उन्होंने इसे हर समस्या की “दवा” बताते हुए कहा कि अगर भारत अपने संसाधनों और तकनीक के लिए खुद पर भरोसा करेगा तो कोई चुनौती उसे रोक नहीं पाएगी।
‘समुद्र से समृद्धि’ और नई परियोजनाएँ
भावनगर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य नारा था ‘समुद्र से समृद्धि’। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बंदरगाहों, नौवहन, शहरी विकास, आवास और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना, रोजगार सृजन करना और लॉजिस्टिक्स व कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से माल ढुलाई, पर्यटन और क्रूज़ सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। तटीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और हजारों लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर तैयार होंगे। उन्होंने इसे भारत की ब्लू इकॉनमी को गति देने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
पुराने ढाँचे पर सवाल और नए विज़न की झलक
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में पिछली नीतियों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश ‘लाइसेंस-कोटा राज’ में जकड़ा रहा, जिससे विकास की गति धीमी हो गई। इसके विपरीत, उनकी सरकार ने मेक इन इंडिया और नीति सुधारों को आगे बढ़ाकर निवेश आकर्षित करने और उद्योगों को मजबूत बनाने का काम किया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक आत्मनिर्भरता की भावना को अपनाएगा।
सेमीकंडक्टर और शिपबिल्डिंग: भारत की नई चुनौती
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में घरेलू निर्माण को बढ़ाना न केवल आर्थिक दृष्टि से जरूरी है बल्कि यह रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है।
आज वैश्विक सप्लाई-चेन में बाधाएँ और अंतरराष्ट्रीय तनाव इस बात का सबूत हैं कि किसी भी देश को अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भारत अगर इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हो गया तो वैश्विक बाजार में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।
जनता का उत्साह और रोडशो
भावनगर में पीएम मोदी के आगमन पर लोगों ने जोरदार स्वागत किया। शहर में उनके रोडशो के दौरान हजारों लोग सड़कों पर उमड़ पड़े। सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ भी आयोजन का हिस्सा बनीं। लोगों में आत्मनिर्भर भारत के संदेश को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
निष्कर्ष
पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट था — विदेशी निर्भरता भारत की सबसे बड़ी कमजोरी है। चाहे तकनीक हो, उद्योग हो या समुद्री क्षेत्र, भारत को अब अपने दम पर खड़ा होना होगा। ‘चिप हो या शिप’ का नारा केवल एक भाषण नहीं बल्कि उस बड़े विज़न का हिस्सा है जिसमें भारत को 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर बनाना शामिल है।
प्रधानमंत्री ने इसे केवल सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना और देश के उद्योगों को मजबूत करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा।




