कांग्रेस की केंद्रीय कार्यसमिति (CWC) की बैठक 24 सितंबर 2025 को पटना में आयोजित हुई। यह बैठक ऐतिहासिक रही क्योंकि लगभग 85 साल बाद पहली बार बिहार में CWC का सत्र बुलाया गया। आखिरी बार 1940 में बिहार में ऐसी बैठक हुई थी। इस बार की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रभारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों से पहले रणनीति तय करना और संगठन को मजबूती देना बताया गया।
बैठक में सबसे ज्यादा जोर सीट-बाँट, चुनावी एजेंडा और जनता के मुद्दों पर दिया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने बेरोजगारी, महंगाई, किसान संकट और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमले जैसे विषयों को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया। बैठक में यह भी तय किया गया कि कांग्रेस ‘वोट चोरी’ और चुनावी धांधली जैसे आरोपों को बड़े स्तर पर उठाएगी और बिहार से ही पूरे देश को यह राजनीतिक संदेश देगी।
पटना में बैठक आयोजित करने का मकसद केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका एक बड़ा प्रतीकात्मक महत्व भी है। कांग्रेस ने इस आयोजन को 1940 की बैठक से जोड़कर जनता के सामने ऐतिहासिक विरासत और लोकतांत्रिक परंपरा की याद दिलाई। पार्टी का मानना है कि इससे कार्यकर्ताओं में जोश और आत्मविश्वास बढ़ेगा और विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी।
इस बैठक को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह महज चुनावी नाटक है, जिसका मकसद सत्ता की होड़ से आगे कुछ नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना था कि कांग्रेस बिहार में कोई खास जनाधार नहीं रखती, ऐसे में यह बैठक केवल राजनीतिक दिखावा है। हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि बिहार की राजनीति में बदलाव लाने और विपक्षी गठबंधन को मजबूती देने में यह बैठक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पटना में हुई CWC बैठक का सीधा असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। इससे पार्टी को न केवल सीट-बाँट पर केंद्रीय हस्तक्षेप का फायदा मिलेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं को भी यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व चुनाव को गंभीरता से ले रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बैठक से निकली रणनीति और संदेश जमीन पर कितना असर डालते हैं और बिहार की राजनीति में कांग्रेस कितनी मजबूती से खड़ी हो पाती है।




