वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल: रूस ने पेट्रोल और डीजल निर्यात पर सीमा लगाई

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रूस ने हाल ही में डीजल और पेट्रोल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है, जो 2025 के अंत तक प्रभावी रहेगा। यह कदम मुख्य रूप से यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद रूस की तेल रिफाइनरी क्षमता में आई कमी और घरेलू ईंधन आपूर्ति में उत्पन्न संकट के कारण उठाया गया है। डीजल निर्यात पर लागू यह आंशिक प्रतिबंध केवल उत्पादकों पर लागू होगा, जबकि पुनर्विक्रेताओं को अब डीजल निर्यात करने की अनुमति नहीं होगी, जिससे घरेलू मांग को प्राथमिकता दी जा सके। वहीं, पेट्रोल पर पहले से लागू प्रतिबंध को 2025 के अंत तक बढ़ा दिया गया है, हालांकि यह अंतर-सरकारी समझौतों जैसे मंगोलिया के साथ किए गए समझौतों पर असर नहीं करेगा।

यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस की प्रमुख रिफाइनरी सुविधाओं पर ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें रियाज़ान और बश्कोर्तोस्तान जैसी रिफाइनरियां शामिल हैं। इन हमलों की वजह से रूस की कुल रिफाइनिंग क्षमता में लगभग 20% की गिरावट आई है, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन की आपूर्ति गंभीर संकट में है और कई क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी दिखाई दे रही है। इस प्रतिबंध का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ा है और ब्रेंट क्रूड की कीमत $69.55 प्रति बैरल तक पहुँच गई है, जो पिछले तीन महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के निर्यात में कमी वैश्विक ऊर्जा कीमतों को और बढ़ा सकती है।

भारत, जो रूस से तेल का प्रमुख आयातक है, इस प्रतिबंध से प्रभावित हो सकता है। फिलहाल, रूस ने कच्चे तेल के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन भविष्य में इस पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना के कारण भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत खोजने की जरूरत पड़ सकती है। कुल मिलाकर, रूस द्वारा डीजल और पेट्रोल निर्यात पर लगाए गए ये प्रतिबंध घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हैं, जबकि यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत जैसी देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ा है।

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