दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने पारंपरिक पटाखों पर लगी पूर्ण रोक को बरकरार रखते हुए केवल “ग्रीन पटाखों” की सीमित बिक्री और उपयोग की अनुमति दी है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि त्योहारों के आनंद और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, इसलिए कुछ सख्त शर्तों के साथ यह छूट दी जा रही है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन पटाखों की बिक्री 15 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2025 तक ही की जा सकेगी। इन्हें केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ऑफलाइन बेचा जाएगा, जबकि ऑनलाइन या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सभी पटाखों पर QR कोड और PESO की मान्यता अनिवार्य होगी ताकि नकली या गैर-मानक पटाखों की बिक्री रोकी जा सके। ग्रीन पटाखों का उपयोग केवल दिवाली की रात निर्धारित समयावधि में ही किया जा सकेगा, और उसका पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को निगरानी टीमें गठित करने का निर्देश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को आदेश दिया है कि वे 18 अक्टूबर से वायु गुणवत्ता (AQI) की लगातार निगरानी करें और अदालत को रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि पटाखों के कारण वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर तक पहुँचती है, तो आदेश को तुरंत वापस लिया जा सकता है और दोबारा सख्त प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।
इस आदेश पर व्यापारियों और आम जनता की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। जहां पटाखा विक्रेताओं और व्यापारिक संगठनों ने इसे दिवाली सीज़न में राहत के तौर पर देखा है, वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि इस छूट का फायदा गैर-जिम्मेदाराना तरीके से नहीं उठाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन को सख्ती से यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही बाजार में उपलब्ध हों और उनका सीमित उपयोग ही किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक तरह से संतुलित दृष्टिकोण माना जा रहा है, जिसमें त्योहार की परंपराओं का सम्मान करते हुए प्रदूषण नियंत्रण और जनस्वास्थ्य की रक्षा पर समान रूप से ध्यान दिया गया है। अदालत ने साफ किया कि अगर आदेश की शर्तों का उल्लंघन पाया गया, तो भविष्य में किसी तरह की छूट पर पुनर्विचार किया जा सकता है।




