हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, भारत सरकार ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच इस विषय पर कोई बातचीत नहीं हुई और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और तेल आयात नीति को स्वतंत्र रूप से निर्धारित करता है और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।
रूस ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। रूसी उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने स्पष्ट किया कि भारत पर कोई भी दबाव नहीं डाला जा सकता और भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए स्वतंत्र निर्णय लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग जारी रहेगा, क्योंकि यह दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी है। वर्तमान में भारत अपनी कुल तेल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से प्राप्त करता है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि अमेरिका की ओर से दबाव डालने की कोशिश की जा रही है, भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि भारत की आयात नीति पूरी तरह उपभोक्ता हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए, किसी भी बाहरी दबाव के बिना अपने ऊर्जा संबंधों का निर्धारण करेगा। भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग मजबूत बना रहेगा और दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।




